अमर शहीद विजय कुमार पांडे को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि।
▪️अमर शहीद के श्रद्धांजलि में अतिथियों को भेंट किया गया स्मृति चिन्ह।
▪️ अमर शहीद विजय कुमार पांडे को याद कर पिता की हुई आंखें नम।
जनपद के अमौली विकासखंड क्षेत्र के सठीगवां गांव में अमर शहीद विजय कुमार पांडे की स्मृति स्थल पर सात दिवसीय श्री राम कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ का आयोजन होने के पश्चात मंगलवार को सेना के जवानों द्वारा सलामी और श्रद्धांजलि का कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें उपस्थित सैनिकों ने अमर शहीद विजय कुमार पांडे को याद कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम का आयोजन धर्मेंद्र सिंह के संचालन में अमर शहीद विजय कुमार पांडे को श्रद्धांजलि देकर किया गया।
बृहस्पतिवार को कार्यक्रम में जम्मू कश्मीर में कार्यरत बीएसएफ के जवान रंजीत सिंह यादव स्मारक स्थल पर पहुंचे थे और रामकथा को सुन लगातार कार्यक्रम के अंत तक सहयोग देते रहे। कार्यक्रम में श्रद्धांजलि देते हुए सैनिकों ने अपने संबोधन में सैनिकों के कार्यों का वर्णन करते हुए बताया कि एक सैनिक अपने परिवार को छोड़कर देश के लिए अपने धर्म व कर्म के साथ हमेशा खड़ा रहता है।
पुन: नया निर्माण करो।*अमर शहीद विजय कुमार पांडे को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि।*
▪️अमर शहीद के श्रद्धांजलि में अतिथियों को भेंट किया गया स्मृति चिन्ह।
▪️ अमर शहीद विजय कुमार पांडे को याद कर पिता की हुई आंखें नम।
*अमौली/फतेहपुर।*
जनपद के अमौली विकासखंड क्षेत्र के सठीगवां गांव में अमर शहीद विजय कुमार पांडे की स्मृति स्थल पर सात दिवसीय श्री राम कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ का आयोजन होने के पश्चात मंगलवार को सेना के जवानों द्वारा सलामी और श्रद्धांजलि का कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें उपस्थित सैनिकों ने अमर शहीद विजय कुमार पांडे को याद कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम का आयोजन धर्मेंद्र सिंह के संचालन में अमर शहीद विजय कुमार पांडे को श्रद्धांजलि देकर किया गया।
बृहस्पतिवार को कार्यक्रम में जम्मू कश्मीर में कार्यरत बीएसएफ के जवान रंजीत सिंह यादव स्मारक स्थल पर पहुंचे थे और रामकथा को सुन लगातार कार्यक्रम के अंत तक सहयोग देते रहे। कार्यक्रम में श्रद्धांजलि देते हुए सैनिकों ने अपने संबोधन में सैनिकों के कार्यों का वर्णन करते हुए बताया कि एक सैनिक अपने परिवार को छोड़कर देश के लिए अपने धर्म व कर्म के साथ हमेशा खड़ा रहता है। एक सैनिक का सबसे पहला धर्म व कर्तव्य होता है कि अपना समर्पण देश सेवा के लिए करता है। शहीद के भाई अजय कुमार पांडे ने फौजी परिवार से होने के अपने अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि देशभक्ति एक जज्बा है, एक अनुभूति है। एक फौजी के जीवन में दो ही चीजें होती है, शांति और युद्ध। सैनिक के व्यक्तित्व में कुछ गुण बड़े कठोर होते हैं। फौजी यानी अनुशासन, फौजी यानी लक्ष्य पक्का, फौजी यानी पूरे परिवार का उनके साथ पक्के मन और दृढ़ इरादों वाला होना है। फौजियों के विषय पर अपने विचार रखते हुए भूतपूर्व सैनिक कल्याण संगठन के अध्यक्ष श्री बृजभूषण तिवारी ने कहा कि अगर हम फौज में नहीं है तो जो कार्य हमारे जिम्मे है वही कर्तव्य परायणता के साथ निभाएं। जरूरी नहीं कि हम सब सीमा पर जाए यह संभव भी नहीं है लेकिन देश में रहते हुए राष्ट्रीय मूल्यों का पालन करना तो संभव है, हम वही कर सकते हैं।
इस अवसर पर मंच की सदस्याओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए। अनिल कुमार सिंह सहायक नगर आयुक्त कानपुर नगर ने अत्यंत ओजस्वी स्वरों मेंअपनी देशभक्ति की सुंदर रचनाएं प्रस्तुत की।कार्यक्रम में उपस्थित सभी सैनिकों ने अपनी बात रखते हुए देशभक्ति की सुंदर रचनाओं को प्रस्तुत करते हुए कहा कि “उठो, धरा के अमर सपूतों।
पुन: नया निर्माण करो।
जन-जन के जीवन में फिर से
नव स्फूर्ति, नव प्राण भरो।
नई प्रात है नई बात है
नया किरन है, ज्योति नई।
नई उमंगें, नई तरंगें
नई आस है, साँस नई।
युग-युग के मुरझे सुमनों में
नई-नई मुस्कान भरो।
उठो, धरा के अमर सपूतों।
पुन: नया निर्माण करो।।”
सैनिक संगठन प्रकोष्ठ नई दिल्ली से पधारी भावना शर्मा ने सैनिकों के प्रति विचार व्यक्त करते हुए बताया, ” यूं तो एक चिंगारी मंगल पांडे ने सुलगाई थी पर आजादी की आग हर हिन्दुस्तानी ने फैलाई थी। देशभक्ति का दायित्व उन सभी नागरिकों का है जो देश में रहते हैं। जो अपने मूलभूत अधिकारों के साथ देश में स्वतंत्र रूप से जीवन जीते हैं। देश हमारा है, सारे प्राकृतिक संसाधन हमारे हैं, और हम हक से कहते हैं कि हिंदुस्तान हमारा है। ऐ से में हर देशवासी देशभक्त बन सकता है यदि वह अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक है। युद्ध हो या शांति हर नागरिक को अपने कार्यक्षेत्र में दायित्वों का निर्वहन ईमानदारी एवं पूर्ण निष्ठा से करना चाहिए। सैनिक सीमाओं पर डटे रहते हैं। ऐसे में सामान्य नागरिक सहयोग का हाथ बढ़ाकर सैनिकों के साथी बन सकते हैं।
सहायक नगर आयुक्त कानपुर नगर की कुमारी पूजा त्रिपाठी ने कहा,” देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी जितनी हमारे सैनिकों की है उतनी ही देश के प्रत्येक नागरिक की भी है। सैनिक सरहद पर देश की रक्षा करते हैं। देश के नागरिक देशभक्ति का परचम लहराने के साथ अपने कार्य के प्रति ईमानदारी और समर्पण के द्वारा देश को सुरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं।
अमर शहीद के पिता कृष्ण कुमार पांडे ने कहा, ‘ यह सही है कि देश की सीमाओं की रक्षा करना निसंदेह सैनिकों का कर्तव्य है। और वे उसे बखूबी अंजाम देते हैं। लेकिन प्रकारांतर से अपने कार्य स्थल पर नैतिक मूल्यों की रक्षा करना हर नागरिक का कर्तव्य है। सोचना यह है कि क्या हम उनकी रक्षा करते हैं? यदि नहीं तो हम सैनिकों द्वारा सुरक्षित देश को दुर्दशा की ओर ठेलने के लिए उत्तरदायी हैं। जब तक हर नागरिक अपनी कर्तव्य चौकी पर मुस्तैदी से तैनात नहीं होता तब तक देश सही अर्थों में पूर्णतः सुरक्षित हो ही नहीं सकता।
अमर शहीद विजय कुमार पांडे की माता श्रीमती सरिता देवी ने अपने विचार व्यक्त किए कि हमारी सेना हमारा अभिमान है हमारे सैनिक सिर्फ सरहद पर ही तैनात नहीं रहते बल्कि जरूरत पड़ने पर घरेलू मोर्चे पर भी अपनी सशक्त उपस्थिति से हमारा हौसला बढ़ाते हैं फिर चाहे केदारनाथ त्रासदी हो या देश में अशांति की स्थिति सेना हमेशा तत्पर रहती है। हम देश के आम नागरिक जिस तरह सेना की सराहना करते हैं उन्हीं की तरह अपने कर्तव्य को निभाने के प्रति भी सजग रहें। यह देश हम सभी का है देश की खुशहाली और उन्नति के लिये हमें हर छोटी से छोटी बात के लिये सकारात्मक होना चाहिए। राष्ट्रभक्ति का अर्थ सिर्फ हाथ में बंदूक लिए सरहद पर खड़े होकर दुश्मनों का सामना करना नहीं है। हमारे देश के अंदर अशिक्षा असमानता, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, सांप्रदायिकता रूपी जो दुश्मन हैं जो हमारे देश को खोखला कर रहे हैं उनसे हम आम इंसान ही लड़ सकते हैं। अफवाहों पर ध्यान न देना उन्हें फैलाने में सहयोग न करना अंधविश्वास दूर करने की कोशिश, शिक्षा का प्रसार, भ्रष्टाचार की जड़ पर प्रहार जैसे अनेक मुद्दे हैं जिनमें हम अपनी मजबूत और महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। राष्ट्र प्रेम हाथ में झंडा फहराने से बढ़कर रोजमर्रा के जीवन की जिम्मेदारी और कर्तव्य निभाना है। आम नागरिकों का स्व अनुशासन ही किसी भी देश की उन्नति और पहचान है। इस अवसर पर सभी सैनिकों व मुनियों ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए। इस मौकेअमर शहीद के पिता कृष्ण कुमार पांडे व माता सरिता देवी, भाई अजय कुमार पांडे, हरिद्वार से पधारे अक्षयानंद जी महाराज, प्रेरणानंद जी महाराज, मेघानंद जी महाराज, पूर्व सैनिक संगठन के सदस्य रामकेश यादव, महेंद्र पांडे, शिव गोपाल तिवारी, गंगाराम सविता, रामप्रसाद सचान, सर्वेश उत्तम, ओम प्रकाश पाल, श्यामलाल सचान, सागर जीत सिंह, विजय सेन दुबे, प्रेम सिंह गौतम, अमर बहादुर सिंह, अर्जुन सिंह, बलराम सिंह व संगीत वाचक प्रेम बहादुर नामदेव, योगाध्यापक ज्ञानानंद जी महाराज, गायक धर्मेंद्र सिंह, तबला वादक सोमनाथ शर्मा, भावना शर्मा सहित काफी पुरुष हुआ महिलाएं उपस्थित रहे।
“जन-जन के जीवन में फिर से
नव स्फूर्ति, नव प्राण भरो।
नई प्रात है नई बात है
नया किरन है, ज्योति नई।
नई उमंगें, नई तरंगें
नई आस है, साँस नई।
युग-युग के मुरझे सुमनों में
नई-नई मुस्कान भरो।
उठो, धरा के अमर सपूतों।
पुन: नया निर्माण करो।।”
सैनिक संगठन प्रकोष्ठ नई दिल्ली से पधारी भावना शर्मा ने सैनिकों के प्रति विचार व्यक्त करते हुए बताया, ” यूं तो एक चिंगारी मंगल पांडे ने सुलगाई थी पर आजादी की आग हर हिन्दुस्तानी ने फैलाई थी। देशभक्ति का दायित्व उन सभी नागरिकों का है जो देश में रहते हैं। जो अपने मूलभूत अधिकारों के साथ देश में स्वतंत्र रूप से जीवन जीते हैं। देश हमारा है, सारे प्राकृतिक संसाधन हमारे हैं, और हम हक से कहते हैं कि हिंदुस्तान हमारा है। ऐ से में हर देशवासी देशभक्त बन सकता है यदि वह अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक है। युद्ध हो या शांति हर नागरिक को अपने कार्यक्षेत्र में दायित्वों का निर्वहन ईमानदारी एवं पूर्ण निष्ठा से करना चाहिए। सैनिक सीमाओं पर डटे रहते हैं। ऐसे में सामान्य नागरिक सहयोग का हाथ बढ़ाकर सैनिकों के साथी बन सकते हैं।
सहायक नगर आयुक्त कानपुर नगर की कुमारी पूजा त्रिपाठी ने कहा,” देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी जितनी हमारे सैनिकों की है उतनी ही देश के प्रत्येक नागरिक की भी है। सैनिक सरहद पर देश की रक्षा करते हैं। देश के नागरिक देशभक्ति का परचम लहराने के साथ अपने कार्य के प्रति ईमानदारी और समर्पण के द्वारा देश को सुरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं।
अमर शहीद के पिता कृष्ण कुमार पांडे ने कहा, ‘ यह सही है कि देश की सीमाओं की रक्षा करना निसंदेह सैनिकों का कर्तव्य है। और वे उसे बखूबी अंजाम देते हैं। लेकिन प्रकारांतर से अपने कार्य स्थल पर नैतिक मूल्यों की रक्षा करना हर नागरिक का कर्तव्य है। सोचना यह है कि क्या हम उनकी रक्षा करते हैं? यदि नहीं तो हम सैनिकों द्वारा सुरक्षित देश को दुर्दशा की ओर ठेलने के लिए उत्तरदायी हैं। जब तक हर नागरिक अपनी कर्तव्य चौकी पर मुस्तैदी से तैनात नहीं होता तब तक देश सही अर्थों में पूर्णतः सुरक्षित हो ही नहीं सकता।
अमर शहीद विजय कुमार पांडे की माता श्रीमती सरिता देवी ने अपने विचार व्यक्त किए कि हमारी सेना हमारा अभिमान है हमारे सैनिक सिर्फ सरहद पर ही तैनात नहीं रहते बल्कि जरूरत पड़ने पर घरेलू मोर्चे पर भी अपनी सशक्त उपस्थिति से हमारा हौसला बढ़ाते हैं फिर चाहे केदारनाथ त्रासदी हो या देश में अशांति की स्थिति सेना हमेशा तत्पर रहती है। हम देश के आम नागरिक जिस तरह सेना की सराहना करते हैं उन्हीं की तरह अपने कर्तव्य को निभाने के प्रति भी सजग रहें। यह देश हम सभी का है देश की खुशहाली और उन्नति के लिये हमें हर छोटी से छोटी बात के लिये सकारात्मक होना चाहिए। राष्ट्रभक्ति का अर्थ सिर्फ हाथ में बंदूक लिए सरहद पर खड़े होकर दुश्मनों का सामना करना नहीं है। हमारे देश के अंदर अशिक्षा असमानता, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, सांप्रदायिकता रूपी जो दुश्मन हैं जो हमारे देश को खोखला कर रहे हैं उनसे हम आम इंसान ही लड़ सकते हैं। अफवाहों पर ध्यान न देना उन्हें फैलाने में सहयोग न करना अंधविश्वास दूर करने की कोशिश, शिक्षा का प्रसार, भ्रष्टाचार की जड़ पर प्रहार जैसे अनेक मुद्दे हैं जिनमें हम अपनी मजबूत और महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। राष्ट्र प्रेम हाथ में झंडा फहराने से बढ़कर रोजमर्रा के जीवन की जिम्मेदारी और कर्तव्य निभाना है। आम नागरिकों का स्व अनुशासन ही किसी भी देश की उन्नति और पहचान है। इस अवसर पर सभी सैनिकों व मुनियों ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए। इस मौकेअमर शहीद के पिता कृष्ण कुमार पांडे व माता सरिता देवी, भाई अजय कुमार पांडे, हरिद्वार से पधारे अक्षयानंद जी महाराज, प्रेरणानंद जी महाराज, मेघानंद जी महाराज, पूर्व सैनिक संगठन के सदस्य रामकेश यादव, महेंद्र पांडे, शिव गोपाल तिवारी, गंगाराम सविता, रामप्रसाद सचान, सर्वेश उत्तम, ओम प्रकाश पाल, श्यामलाल सचान, सागर जीत सिंह, विजय सेन दुबे, प्रेम सिंह गौतम, अमर बहादुर सिंह, अर्जुन सिंह, बलराम सिंह व संगीत वाचक प्रेम बहादुर नामदेव, योगाध्यापक ज्ञानानंद जी महाराज, गायक धर्मेंद्र सिंह, तबला वादक सोमनाथ शर्मा, भावना शर्मा सहित काफी पुरुष हुआ महिलाएं उपस्थित रहे।

