कानपुर: पत्रकार विनय प्रकाश मिश्रा(योगाचार्य)ने अपने पिता(Father) के ऊपर कुछ अनमोल शब्द व्यक्त किए

कानपुर:- पिता दिवस में हम अपने पिता के लिए जितना कुछ लिखें उतना ही कम होगा ईश्वर ऐसे पिता सभी को सात जन्मो तक मिलते रहे। हमारे पिता जी श्री ओम प्रकाश मिश्रा जब मैं पैदा भी नहीं हुआ था तब से आज तक करीब 40 वर्षा से कड़ी मेहनत करके और प्राइवेट सर्विस करके हमें पढ़ाया लिखाया खिलाया पिलाया इस काबिल बनाया कि अब हम उनकी सेवा कर सकें मेरा तो जन्म भी नहीं हुआ था तब से वह सुबह 3:00 बजे उठकर के रोज घरों घरों जाकर के अखबार बांटते हैं एक तरीके से देखा जाए तो हमारे पिता श्री कर्म योगी है हमारे पिता श्री को दैनिक जागरण अखबार से कर्म योगी का प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया गया था 2 साल पहले। हम मध्यमवर्गीय लोग हैं जब दुनिया सो रही होती है

उस वक्त हमारे पिता श्री घरों घरों जाकर के अखबार बांटते हैं हमने भी अपने पिताजी के साथ अखबार बांटा है करीब दस साल एक तरीके से देखा जाए तो प्रिंट मीडिया में सबसे अहम भूमिका होती है एक हॉकर की चाहे आंधी आए तूफान आए पानी गिरे कुछ भी हो हर कीमत पर वह अखबार पहुंचाते हैं इतनी कड़ी मेहनत करके आज मुझे इस काबिल बनाया है प्रिंट मीडिया का सबसे बड़ा पत्रकार यदि मैं किसी को समझता हूं, तो वो है एक हॉकर यदि यह हॉकर ही ना हो तो देश दुनिया समाज की ताजा खबरें कौन जनता तक पहुंचाएगा फिर भी सरकार ने कभी ऐसे हॉकरों के लिए कभी कुछ सोचा नहीं है सभी प्रिंट मीडिया ने प्रयास तो बहुत किया लेकिन कुछ सुविधाएं मिलनी चाहिए सरकार से लेकिन वह भी नहीं मिलती है हॉकर गरीब नहीं होता तो अमीर भी नहीं होता है

वह अपनी मेहनत और कर्म पथ से कभी पीछे नहीं हटता है। आज मैं अपने पिता के आदर्शों पर ही चल रहा हूं और प्रयास कर रहा हूं कि ऊंचाइयों को छूने की मैं इस काबिल बनना चाहता हूं की मेरे पिता श्री को मुझ पर गर्व हो। जितना कुछ मेरे लिये पिता श्री ने किया है उसका यदि मैं एक परसेंट भी अपनी लाइफ में यदि कर पाया तो मैं अपने आप को बहुत बड़ा सौभाग्यशाली पुत्र समझूंगा।

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