उस वक्त हमारे पिता श्री घरों घरों जाकर के अखबार बांटते हैं हमने भी अपने पिताजी के साथ अखबार बांटा है करीब दस साल एक तरीके से देखा जाए तो प्रिंट मीडिया में सबसे अहम भूमिका होती है एक हॉकर की चाहे आंधी आए तूफान आए पानी गिरे कुछ भी हो हर कीमत पर वह अखबार पहुंचाते हैं इतनी कड़ी मेहनत करके आज मुझे इस काबिल बनाया है प्रिंट मीडिया का सबसे बड़ा पत्रकार यदि मैं किसी को समझता हूं, तो वो है एक हॉकर यदि यह हॉकर ही ना हो तो देश दुनिया समाज की ताजा खबरें कौन जनता तक पहुंचाएगा फिर भी सरकार ने कभी ऐसे हॉकरों के लिए कभी कुछ सोचा नहीं है सभी प्रिंट मीडिया ने प्रयास तो बहुत किया लेकिन कुछ सुविधाएं मिलनी चाहिए सरकार से लेकिन वह भी नहीं मिलती है हॉकर गरीब नहीं होता तो अमीर भी नहीं होता है
वह अपनी मेहनत और कर्म पथ से कभी पीछे नहीं हटता है। आज मैं अपने पिता के आदर्शों पर ही चल रहा हूं और प्रयास कर रहा हूं कि ऊंचाइयों को छूने की मैं इस काबिल बनना चाहता हूं की मेरे पिता श्री को मुझ पर गर्व हो। जितना कुछ मेरे लिये पिता श्री ने किया है उसका यदि मैं एक परसेंट भी अपनी लाइफ में यदि कर पाया तो मैं अपने आप को बहुत बड़ा सौभाग्यशाली पुत्र समझूंगा।

