मध्यप्रदेश की नगर परिषद पंधाना द्वारा क्षेत्र के निवासियों की प्यास बुझाने के लिए 12 करोड़ 25 लाख रूपए जल आवर्धन योजना में खर्च किये गए हैं, जिससे शहर के पन्द्रह वार्डो में पाइप लाइन के जरिए पानी पहुंचाया जा सके । लेकिन, ठेकेदार की लापरवाही के कारण करोड़ों की योजना फेल होती दिख रही है। इसका मुख्य कारण कार्यस्थल पर उस समय टेक्निकल इंजीनियर का मौजूद ना रहना | मजदूर और कुछ पेटी कांट्रेक्टर के भरोसे ही इतने बड़े काम को अंजाम दिया गया है, जबकि टेक्निकल इंजीनियर की देखरेख में काम होना चाहिए, जिससे नगर में फैली पाइप लाईन का लेबल एक जेशा होता कही १ फीट गहरीकरण तो कही २ फीट गहरीकरण कर पाइप डाल दिए गए है | कही भी किसी भी जगह पाईप के नीचे बेस नहीं डाला गया | गड्ढों का लेबल और पाइप का ज्वाइंट भी सही नहीं रखा गया है | कही लाइने नाली के बीच में से निकाल दी हे जिससे बरसात में नालियों का पानी तक अवरूध्द हो रहा है । शहर के वार्डो में बिछ रही पाइप का ना तो लेबल सही है और ना ही पाइप के ज्वाइंट को देखा जा
रहा है । सबसे बड़ी बात तो यह है कि पाइप बिछाने के लिए वार्डो में बनी नाली तक के बीच में से पाईप लाइन डाल दी है | घरो तक के डिलेवरी पाईपो ने दम तक तोड़ दिया है क्योकि जब नीले कलर के डिलेवरी पाईपो को डाला गया तो उन्हें नीचे दबाया नहीं गया वाहनो ने निकलकर पुरे पाईपो की छतिग्रस्त्र कर दिये है एक बार दौबारा पुरे नगर की लाइनों को खोद के दुरस्त करना होगी | एक बार ढेकेदार ने लाइने डाल दी अब उसमे विवाद की स्थिति भी निर्मित होगी क्योकि लाइने खराब हो चुकी है | ठेकेदार के कर्मचारी ने मनमाने ढंग से कार्य को अंजाम दिया है | जल आवर्धन योजना के कार्य को देखकर लोगों का यही कहना है कि करोड़ों गए पानी में । बता दें कि एक दशक पहले भी पी एच् ई की पाईप लाइन लाखो फूंकने के बाद लोगों को पानी नहीं पिला सकी । इस बार भी उसी प्रकार से कार्य को अंजाम दिया जा रहा है ।


