बिजली न आने के कारण खेत की नहीं हो पा रही थी सिंचाई किसान ने की आत्महत्या

बाँदा:- यूपी में जब से योगी सरकार और केंद्र में मोदी सरकार आयी है तब से बुंदेलखंड के किसानों के लिये बड़े-बड़े दावे किए जा रहे है कि बुंदेलखंड के किसानों को किसी चीज की कोई कमी नहीं होने देंगे और किसानों की फसल को दोगुना करेंगे, लेकिन भाजपा सरकार के दावे को फेल कर रहे बिजली विभाग की कारस्तानी के कारण आज शुक्रवार को बुंदेलखंड के एक किसान जो कि निजी नलकूप का मालिक था,

बिजली के न आने से परेशान होकर आत्महत्या कर लिया।ये बाँदा जनपद के चिल्ला थाना क्षेत्र का। जहां कर्ज की मार और सही समय पर खेतों में पानी न लगने के कारण एक 42 वर्षीय किसान ने परेशान होकर फांसी लगाकर जान दे दी। घटना की जानकारी मिलते ही पूरे घर में कोहराम मच गया।जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंचे और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिये के भेज दिया।

घटना चिल्ला थाना क्षेत्र के ग्राम महेन्दू की है। महेन्दू निवासी धनपत पुत्र मुलकु उम्र 42 साल के पास 18 बीघा खेत हैं।जिसमे वह एक निजी नलकूप भी लगवाए हुए हैं।लेकिन बिजली विभाग की लपरवाही के चलते 24 घण्टे में मात्र 4 से 5 घण्टे ही बिजली मिलने के कारण एक दिन में केवल 1 बीघा खेत ही सींच पाने की वजह से परेशान किसान ने यह कदम उठा हुआ है।

मृत किसान के ऊपर केसीसी का लगभग 2 लाख रुपए व बिजली विभाग की नोटिस मिलने के कारण,बेटी की शादी के लिए लिए गए कर्ज व गिरवी हुए खेत को छुड़वाने के लिए मानसिक तनाव से गुजर रहा था।वही उस किसान के पास कमाई का एक मात्र साधन खेती ही हैं।जब उससे ही कुछ मिलने की आशा नही थी

तो उसने आत्महत्या कर लिया।मृत किसान के 13 वर्षीय बेटे तेन सिंह ने बताया कि कर्ज व खेत न सींचे जाने के कारण पूरी-पूरी रात जगते थे घर में सब लोग।किसान की मौत से परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है, एक ओर किसान पैलानी तहसील क्षेत्र में बिजली की समस्या को लेकर पलरा विधुत सब-स्टेशन में धरना दे रहा है तो दूसरी ओर एक किसान खेत में पानी न लगने के कारण आत्महत्या करने के लिए विवश हो गया। 

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