फतेहपुर/खागा:- बुन्देलखण्ड के पानी ,पहाड़ , प्रकृति की रक्षा के लिए प्रयासरत बुन्देलखण्ड राज्य के लिए प्रधानमंत्री को 24 बार पत्र लिख चुके बुन्देलखण्ड राष्ट्र समिति के केंद्रीय अध्यक्ष प्रवीण पाण्डेय ने आज मुख्यमंत्री को पत्र लिख मौरंग खदानों के संचालन में किसान हितों की रक्षा की मांग की विदित हो कि प्रदेश में बरसात का सीजन समाप्त होने के बाद से ही मौरंग, बालू खदानों का संचालन शुरू हो जाता है।
प्रति वर्ष की तरह ही इस बार भी फतेहपुर जनपद की अलग-अलग तहसीलों में मौरंग खदानों का संचालन शुरू हुआ। इस बार जो देखने को मिल रहा है, उसमे खदान संचालक किसानों का जबरदस्त उत्पीड़न कर रहे हैं, जानकारी के मुताबिक किशनपुर थाने के संगोलीपुर मड़इयन मौरंग खदान में 20 दिन के अंदर किसानों के साथ तीन बार मारपीट की घटना हो चुकी है।
बीते 08 दिसंबर की रात फसल सिंचाई कर रहे किसानों को बंधक बनाकर खदान से आए गुर्गों ने पीटा। घायल किसानों का इलाज कराने की बजाय, उन्हें धमकी देकर चुप करा दिया गया। स्थानीय पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध बनी रहती है। तहसील प्रशासन के अधिकारी खदान संचालकों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने की बजाय,
किसानों को ही डांट-डपटकर शांत करा देते हैं, जैसा कि आने वाले दिनों में विधान सभा चुनाव होने वाले हैं। केंद्र व प्रदेश सरकार अपनी निष्पक्ष, पारदर्शी कार्यप्रणाली के लिए प्रतिवद्ध है। ऐसे में किसानों के साथ होने वाली इस प्रकार की घटनाएं, सरकार की साख को प्रभावित कर रही है।
भाजपा का सक्रिय कार्यकर्ता व बुंदेलखंड राष्ट्र समिति का केंद्रीय अध्यक्ष होने के नाते मै इस घटनाक्रम का प्रबल विरोध करता हूं। साथ ही आपसे निवेदन है कि फतेहपुर जनपद में संचालित मौरंग खदानों में किसान हित को ध्यान में रखते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देशित करने की कृपा करेंll
प्रति वर्ष की तरह ही इस बार भी फतेहपुर जनपद की अलग-अलग तहसीलों में मौरंग खदानों का संचालन शुरू हुआ। इस बार जो देखने को मिल रहा है, उसमे खदान संचालक किसानों का जबरदस्त उत्पीड़न कर रहे हैं, जानकारी के मुताबिक किशनपुर थाने के संगोलीपुर मड़इयन मौरंग खदान में 20 दिन के अंदर किसानों के साथ तीन बार मारपीट की घटना हो चुकी है।
बीते 08 दिसंबर की रात फसल सिंचाई कर रहे किसानों को बंधक बनाकर खदान से आए गुर्गों ने पीटा। घायल किसानों का इलाज कराने की बजाय, उन्हें धमकी देकर चुप करा दिया गया। स्थानीय पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध बनी रहती है। तहसील प्रशासन के अधिकारी खदान संचालकों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने की बजाय,
किसानों को ही डांट-डपटकर शांत करा देते हैं, जैसा कि आने वाले दिनों में विधान सभा चुनाव होने वाले हैं। केंद्र व प्रदेश सरकार अपनी निष्पक्ष, पारदर्शी कार्यप्रणाली के लिए प्रतिवद्ध है। ऐसे में किसानों के साथ होने वाली इस प्रकार की घटनाएं, सरकार की साख को प्रभावित कर रही है।
भाजपा का सक्रिय कार्यकर्ता व बुंदेलखंड राष्ट्र समिति का केंद्रीय अध्यक्ष होने के नाते मै इस घटनाक्रम का प्रबल विरोध करता हूं। साथ ही आपसे निवेदन है कि फतेहपुर जनपद में संचालित मौरंग खदानों में किसान हित को ध्यान में रखते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देशित करने की कृपा करेंll
रिपोर्ट वी के द्विवेदी, ब्यूरो चीफ

