ऑपरेशन जागृति 5.0 की शुरुआत, नाबालिगों के घर से भागने पर लगेगी रोक

हाथरस | संवाददाता — नितिन यादव

हाथरस में नाबालिगों के घर से भागने की बढ़ती घटनाओं पर रोक लगाने के लिए ऑपरेशन जागृति 5.0 की शुरुआत की गई। रिजर्व पुलिस लाइन में आयोजित जिला स्तरीय कार्यशाला में पुलिस, प्रशासन और यूनिसेफ ने मिलकर जागरूकता और रोकथाम की रणनीति तय की।

हाथरस पुलिस ने नाबालिग लड़कियों और लड़कों के घर से भागने की बढ़ती घटनाओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से ऑपरेशन जागृति 5.0 की औपचारिक शुरुआत कर दी है। इसी क्रम में शनिवार को रिजर्व पुलिस लाइन हाथरस स्थित माधव प्रेक्षा गृह में जिला स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम पुलिस अधीक्षक हाथरस के नेतृत्व में आयोजित हुआ, जिसमें पुलिस, प्रशासन, पंचायतीराज, शिक्षा विभाग और यूनिसेफ के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह अभियान 14 दिसंबर से 23 दिसंबर 2025 तक आगरा जोन के सभी जनपदों में चलाया जाएगा।

पहले चार चरण रहे सफल

ऑपरेशन जागृति के पहले चार चरणों में महिलाओं और बालिकाओं के विरुद्ध अपराधों में कमी देखी गई है। इन्हीं सकारात्मक परिणामों को देखते हुए अब फेज-5 को और अधिक प्रभावी और लक्षित रूप में लागू किया जा रहा है।

नाबालिगों के गलत फैसलों पर फोकस

इस चरण का मुख्य उद्देश्य नाबालिगों के प्रेम-प्रसंग के चलते घर से भागने की घटनाओं को रोकना और इसके कानूनी, सामाजिक व मानसिक दुष्परिणामों के प्रति जागरूकता फैलाना है।

वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

कार्यशाला में मुख्य विकास अधिकारी प्रदीप नारायण, अपर पुलिस अधीक्षक रामानन्द कुशवाहा, क्षेत्राधिकारी यातायात हिमांशू माथुर, क्षेत्राधिकारी लाइन श्यामवीर सिंह समेत कई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। यूनिसेफ की ओर से दिनेश कुमार और महत्री अग्निहोत्री ने तकनीकी जानकारी साझा की।

पुलिस अधीक्षक का संदेश

पुलिस अधीक्षक ने कहा कि ऑपरेशन जागृति 5.0 केवल कानून-व्यवस्था नहीं, बल्कि समाज में संवाद, समझ और सही मार्गदर्शन का अभियान है। नाबालिग उम्र में लिए गए भावनात्मक निर्णय जीवनभर की परेशानी बन सकते हैं।

साइबर खतरे भी बने कारण

यूनिसेफ प्रतिनिधियों ने बताया कि सोशल मीडिया, ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग और साइबर दबाव के कारण भी कई किशोर गलत कदम उठा लेते हैं। ऐसे मामलों में समय रहते काउंसलिंग बेहद जरूरी है।

गांव-गांव चलेगा अभियान

अभियान के तहत स्कूलों, कॉलेजों, गांवों और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पुलिस, शिक्षक और अभिभावक मिलकर बच्चों को सुरक्षित व्यवहार और सही निर्णय लेने के लिए प्रेरित करेंगे।

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने ऑपरेशन जागृति 5.0 को सफल बनाने और समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।

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