Fatehpur Cort: पूर्व थानाध्यक्ष चांदपुर योगेश कुमार व अमौली चौकी इंचार्ज सहित दो सिपाहियों पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश

फतेहपुर: 9 जून मुख्य न्याययिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने फरवरी माह में अमौली कस्बे में हुई एक घटना के मामले में पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का दिया आदेश कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि तत्कालीन थानाध्यक्ष एवं चौकी इंचार्ज समेत आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ धारा 156 (3) के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए

और उसकी विवेचना किया जाए, उस तत्कलीन चाँदपुर थाना प्रभारी योगेश कुमार सिंह व अमौली चौकी प्रभारी राम नरेश य कांस्टेबल धीरज सिंह व कांस्टेबल दिनेश कुमार गौतम के खिलाफ पूर्व में हुई घटना 27 फरवरी 2022 में समय तकरीबन 9 बजकर 30 मिनट पर हुई घटना को न्यायालय ने मामले को सज्ञान में लेकर 156(3)दण्ड प्रक्रिया सहिता स्वीकृत किया है ।

प्रार्थनापत्र में उल्लेखित तथ्यों के आधार पर उचित धाराओ में आपराधिक मामला पंजिकृत कर सही तरीके से उसकी विवेचना करे तथा प्रथम सूचना रिपोर्ट की एक प्रति तत्काल न्यायालय को प्रेषित करे एवं न्यायालय के आदेश की अनुपालन सुनिश्चित करे व एक सप्ताह के अंदर सही आख्या प्रस्तुत करें एवं इस मामले की विवेचना क्षेत्राधिकारी स्तर पुलिस अधिकारी से कराना सुनिश्चित करे

मुकदमे के वादी रहे वीरेन्द्र तिवारी उर्फ वीरू के अधिवक्ता राघवेंद्र त्रिपाठी की अथक पैरवी के कारण मामले को निष्पक्ष जांच के आदेश न्याययिक मजिस्ट्रेट के द्वारा दिया गया,जहा तक मामले में मारपीट करने का कथन है तो इसके सम्बन्द्ध में आवेदक द्वारा मेडिकल प्रपत्रो की छाया प्रति दाखिल की गई है पत्रावली पर जिसमे आवेदक को कई चोटो का वर्णन है ।

इस सम्बन्द्ध में थाने की आख्या के अनुसार पुलिसकर्मियों व विपक्षीगण के साथ स्वयं मारपीट गली गलौज इत्यादि करने की आख्या के साथ आवेदक के विरुद्ध इसी घटना में प्रथम सूचना रिपोर्ट 40/22 थाना चांदपुर में दर्ज की प्रमाणित प्रति प्रेषित की गई है परंतु इस संबंध में कोई स्पष्टीकरण नहीं प्रस्तुत किया गया है की आवेदक को किस प्रकार से इतनी चोटें आई

यदि न्यायालय द्वारा पुलिस की आख्या को प्रथम दृष्टया विचार में भी लिया जाए तो भी आवेदक के विरुद्ध जब नियमानुसार प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर ली गई तो इसमें पुलिस वालों को या अधिकार नहीं प्राप्त हो जाता कि वह किसी के साथ बर्बरता पूर्ण व्यवहार करते हुए

उसको चोटें कारित करे चूकि प्रकरण में अभियुक्त गण स्वयं पुलिस पक्ष है जिनसे की जनता को सुरक्षित किए जाने की अपेक्षा की जाती है ऐसे में प्रस्तुत प्रकरण में यह न्यायालय ने संज्ञेय अपराध पाते हुए प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने का आधार मानती है और आदेश दिए हैं

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