इलाहाबाद विश्वविद्यालय: विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के लिए पहली बार आयोजित पांच दिवसीय (पूर्ण कालिक) प्रारंभिक प्रशिक्षण कार्यशाला का आज औपचारिक समापन हुआ। यह कार्यशाला गांधी विचार एवं शांति अध्ययन केंद्र के सभागार में आयोजित हुई। इस कार्यशाला के पांच दिन में 20 सत्र, 20 विषय विशेषज्ञ और 40 नवनियुक्त और प्रोन्नत कर्मचारी उपस्थित थे।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय की यह कार्यशाला इस मामले में विशिष्ट थी कि प्रयागराज के समस्त केंद्रीय कार्यालयों में पांच दिवसीय कार्यशाला कराने वाला यह प्रथम केंद्रीय विश्वविद्यालय बना। इस कार्यशाला में कार्यालय के कामकाज से संबंधित न केवल तकनीकी और राजभाषा संबंधी नियमों संबंधी पहलुओं पर विशिष्ट व्याख्यान हुये बल्कि हास्य योग और हल्के व्यायाम आदि का भी आयोजन हुआ, आयोजन के उद्घाटन अवसर पर नवनियुक्त
और प्रोन्नत कर्मचारियों को राजभाषा कार्यान्वयन समिति के अध्यक्ष एवं कुलसचिव प्रो. नरेंद्र कुमार शुक्ल, प्रो. पंकज कुमार, डीन( सीडीसी) और राजभाषा कार्यान्वयन समिति के संयोजक एवं गांधी विचार एवं शांति अध्ययन संस्थान के निदेशक, प्रो. संतोष भदौरिया का सानिध्य मिला था। पहले दिन विषय विशेषज्ञ के तौर पर प्रो. ए. आर. सिद्दिकी(भूगोल विभाग), प्रो. आशीष खरे (अध्यक्ष, आइसीटी सेल), श्री ए. के. सिंह(उप कुलसचिव) ने अपनी बात रखी। दीप प्रज्जवलन के पश्चात इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने कहा कि हमें अपनी कार्यशैली को भी प्रोन्नत करना होगा।
तेजी से बदलती हुई तकनीक को आत्मसात करते हुए हमें अपने कार्यों में भी तेजी लानी होगी। प्रो. पंकज कुमार ने इस तरह के ज़रूरी प्रशिक्षण कार्यशाला को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि सीखने सिखाने की कोई उम्र नहीं होती है। हम सबमें जीवन के अंतिम क्षण तक कुछ नया जानने की जिज्ञासा बनी रहनी चाहिए। कुछ कर्मचारी भले ही कुछ दिनों में सेवानिवृत्त हो जायेंगे लेकिन यहां लिया गया प्रशिक्षण उनकी पीढ़ियों को समृद्ध करेगा। प्रो. संतोष भदौरिया ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के नवनियुक्त और प्रोन्नत कर्मचारियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सभी कर्मचारी सीखना चाहते हैं।
गुणवत्ता पूर्ण कार्यसंस्कृति में विश्वास रखते हैं। हमारी कोशिश है कि जब इस कार्यशाला के पांच दिन पूरे हों तो हम यह कह सकें कि यहां से कर्मचारियों को कार्यसंस्कृति में एक नई दिशा मिली है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इतना ज़रूरी और सुंदर आयोजन की अनुमति और प्रोत्साहन कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव जी के दूरदृष्टि को ज़ाहिर करता है। उद्घाटन कार्यक्रम के बाद विषय विशेषज्ञों ने अपने-अपने विषयों से संबंधित विस्तार से बात की, प्रशिक्षण कार्यशाला के दूसरे दिन के सत्र का आरंभ योग अभ्यास से हुआ।
हिंदी विभाग के डॉ. सुजीत कुमार सिंह ने गांधी विचार एवं शांति अध्यन संस्थान के गांधी मंडपम में 40 कर्मचारियों के साथ जब योग आरम्भ किया तो एक सकारात्मक ऊर्जा चारों ओर फैल गई। गांधी संस्थान की शांति और योग की ऊर्जा की चमक कर्मचारियों के चेहरे पर साफ दिख रही थी। विभिन्न योग आसन के साथ ओम की ध्वनि से मंडपम सकारात्मक ऊर्जा से भर गया। इसी सकारात्मक ऊर्जा के साथ कर्मचारी आज के दूसरे सत्र में व्यक्तित्व विकास, एकाग्रता, बुद्धि कौशल को जानने के लिए मंडपम से सभागार में आये तो शारीरिक शिक्षा विभाग की प्रोफेसर अर्चना चहल ने परिवार के विभिन्न उदाहरण देते हुए
एकाग्रता और बुद्धि कौशल की जानकारी कब दे दी ये पता ही नहीं चला और साथ ही कर्मचारी तनाव के विभिन्न कारणों को जान पाए। अर्चना चहल जी ने बड़ी ही बारीकी से दैनिक कार्यों के उदाहरण देते हुए सकारत्मक सोचने के लिए प्रेरित किया, भोजनावकाश के बाद दूसरे दिन का तीसरा सत्र जब आरम्भ हुआ तो मनोविज्ञान विभाग की डॉ. रितु मोदी ने कार्यक्षेत्र में मानसिक संतुलन, व्यवहार आदि पर पीपीटी के माध्यम से रोचक जानकारी कर्मचारियों से साझा की।
हर कर्मचारी से जब बात की तो उसके तनाव को दूर करने के लिए विभिन्न एक्सरसाइज करने की जानकारी दी। इस सत्र का समापन हंसी के अभ्यास के साथ पूरा हुआ और लोगों ने जाना कि हँसना इतना आसान नहीं है। आखिरी और चतुर्थ सत्र टाइपिंग एवं फॉन्ट संबंधित समस्यायों के निवारण का रहा जिसे राजभाषा अनुभाग के अनुवाद अधिकारी हरिओम कुमार और आई.सी.टी सेल के कर्मचारी शिवम ने पूरा किया, कार्यशाला के तीसरे दिन के प्रथम सत्र का आरंभ हास्य योग अभ्यास से हुआ। सभी कर्मचारियों ने गांधी मंडपम के चारो ओर जोर से हंसते हुए अपनी ध्वनि से गांधी मंडपम और उद्यान को गुंजायमान कर दिया। उसके बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ बी. के. सिंह ने कर्मचारियों को कार्यालयीन कार्यों में तकनीक के प्रयोग और उसकी चुनौतियों से अवगत कराया।
कार्यालयीन कार्यों में प्रयोग होने वाले विभिन्न सॉफ्टवेयर, एप्लिकेशन का परिचय देते हुए कहा कि आप तकनीक से भागिए नहीं उसे जानिए, सीखिए। बार-बार प्रयोग कीजिये एक दिन कब आप सीख जाएंगे ये आप को पता भी नहीं चलेगा। भारत सरकार के विभिन्न डिजिटल प्लेटफार्म का वर्णन करते हुए, इविवि में प्रयुक्त तकनीक के प्रयोग पर भी कर्मचारियों की दुविधा को दूर किया, तकनीक की बारीकी को समझते हुए कर्मचारियों ने तीसरे दिवस के दूसरे सत्र में वर्ड, एक्सेल और विभिन्न कार्यालयी सॉफ्टवेर की जानकारी हासिल की। जिसे इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सूचना वैज्ञानिक श्री सुधाकर मिश्रा से प्राप्त की। कार्यालयी कार्यों हेतु वर्ड की उपयोगिता उसके उपयोग और विभिन्न शार्टकट के बारे में जानते हुए हिंदी के विभिन्न सॉफ्टवेयर को इंस्टाल करना जाना, भोजनावकाश के पश्चात तीसरा सत्र कार्यालयीन कार्यों में प्रयुक्त होने वाले विविध टूल्स के नाम रहा। स्मार्ट फोन की आवश्यकता और उसके कार्यालयीन कार्यों के लिए उपयोग की जानकारी राजभाषा अनुभाग के हिंदी अनुवाद अधिकारी श्री हरिओम कुमार ने कर्मचारियों से साझा की। वॉइस टाइपिंग को खेल-खेल में कर्मचारियों ने जाना और स्वयं अपने मोबाइल में इसे प्रयोग किया। साफ्टवेयर इंस्टाल करने में आई.सी.टी सेल के श्री शिवम ने सभी की मदद की।
कर्मचारियों ने हिंदी के विभिन्न एप्लिकेशन के बारे में जाना और उसे अपने मोबाइल में इंस्टाल करके प्रयोग भी किया। कुछ कर्मचारी जिनके पास स्मार्ट फोन नहीं था, उन्होंने भी जब इसको देखा और समझा तो स्वयं आकर उन्होंने मंच से नई तकनीक को सराहा और प्रयोग करके दिखाया। आखिरी और चतुर्थ सत्र में कर्मचारियों ने विधि, कानून और उसके प्रयोग को विस्तार से समझा। सरकारी कर्मचारियों को किन नियमों और अधिनियमों का ध्यान सेवा के दौरान रखना है और उनके अधिकार और कर्तव्य क्या हैं?
साइबर अपराध और सुरक्षा से संबंधी विषय पर भी विस्तार से जानकारी इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विधि अधिकारी डॉ. पीयूष मिश्रा ने प्रदान की, प्रशिक्षण कार्यशाला के चतुर्थ दिवस भी हास्य योग और हल्के व्यायाम के बाद आरंभ हुई। सभी कर्मचारियों ने गांधी मंडपम के चारो ओर जोर से हंसते हुए गांधी उद्यान का चक्कर लगाया और उनकी ध्वनि से गांधी मंडपम और उद्यान गूंज उठा। उसके बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग के प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह ने कर्मचारियों को राजभाषा हिंदी, प्रारूप, हिंदी और तकनीक आदि विषय पर जानकारी प्रदान की।
शब्दों का निर्माण, शब्दों का बनना और उसके चलन पर कर्मचारियों से परिचर्चा की। शब्दों के विभिन्न अर्थ पर भी कर्मचारियों के साथ चर्चा की। साथ ही राजभाषा के विभिन्न नियम तथा अधिनियम से सभी को परिचित कराया। दूसरे सत्र में राजभाषा की अवधारणा एवं मानकीकरण की जानकारी इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग की सहायक आचार्य डॉ. अमृता जी से प्राप्त की। केंद्रीय कार्यालयों में राजभाषा के प्रचार- प्रसार के लिए विभिन्न आयामों की बात करते हुए शब्दों की एकरूपता रखने के लिए किए गए मानकीकृत शब्दों की चर्चा आज के विषय विशेषज्ञ ने कर्मचारियों से की।
राष्ट्रभाषा, मातृभाषा एवं राजभाषा पर चर्चा करते हुए देवनागरी अंको के अंतरराष्ट्रीय स्वरूप के बारे में बताया। तीसरा सत्र नोटिंग, ड्राफ्टिंग, कार्यालयीन पत्र लेखन, रिपोर्ट लेखन, नोट शीट लेखन से संबंधित रहा। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग के सहायक आचार्य डॉ. सुनील कुमार सुधांशु ने कार्यालयीन पत्रावली की जानकारी कर्मचारियों से साझा की। कार्यालय की भाषा और आम बोलचाल की भाषा में अंतर को बताते हुए प्रशासन के विभिन्न शब्दों और उनके हिंदी रूप की जानकारी कर्मचारियों को दी। सरकारी पत्र, अर्ध सरकारी पत्र,व्यक्तिगत पत्र के बारे में बताते हुए नोटिंग लिखने का अभ्यास कराया।
राजभाषा की अवधारणा को उन्होंने अपने व्याख्यान में और विस्तार दिया। चतुर्थ सत्र में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग की सहायक आचार्य डॉ. मीना कुमारी ने मातृभाषा और व्यक्तित्व विकास पर कर्मचारियों के साथ परिचर्चा की। मातृभाषा की चर्चा करते हुए आगे उन्होंने प्रशासन में प्रयोग होने वाले शब्दों के बारे में बताया। एक ही शब्द के विभिन्न प्रयोग और उनके अनेक अर्थ भिन्न- भिन्न कैसे हो जाते हैं इसके बारे में विस्तार से चर्चा की, प्रशिक्षण कार्यशाला के अंतिम दिन फाइल प्रबंधन के बारे में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव श्री देवेश कुमार गोस्वामी ने कर्मचारियों से परिचर्चा की।
फाइल को नंबर किस तरह से देना है, किस तरह से सही पृष्ठांकन होता है तथा हस्ताक्षर का क्रम क्या होता है आदि के बारे में विस्तार से बताया। इसके बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भू विज्ञान विभाग के डॉ प्रकाश कुमार सिंह ने वर्ड, एक्सल, पीपीटी, ई मेल और डिजिटल सिग्नेचर पर चर्चा की, अपराह्न सत्र में समापन समारोह के अवसर पर कर्मचारियों ने साहित्यिक और सांस्कृतिक प्रस्तुति भी दी। उक्त अवसर पर अध्यक्षता और मुख्य अतिथि के तौर पर विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. शेखर श्रीवास्तव,
विशिष्ट अतिथि के तौर पर कुलसचिव और राजभाषा कार्यान्वयन समिति के अध्यक्ष प्रो. नरेंद्र शुक्ल, केंद्रीय सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष प्रो. अजय जैतली उपस्थित थे। स्वागत वक्तव्य गांधी विचार एवं शांति अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रो. संतोष भदौरिया ने दिया। समापन अवसर पर मुख्य अतिथि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता, विज्ञान संकाय प्रो. शेखर श्रीवास्तव ने कहा कि कार्यालयीन कार्यों के पंख होते हैं प्रशिक्षित कर्मचारी। उन्होंने कर्मचारियों से आग्रह किया कि आप सब तकनीक पहलुओं से बखूबी परिचित हों।
जिससे सुरक्षित और तेज कार्य संस्कृति विकसित हो। अभी हमें ई-फाइलिंग और अन्य ज़रूरी कार्यों से भी रूबरू होना है। विशिष्ट अतिथि एवम वित्त अधिकारी प्रो. सुनीलकांत मिश्र ने कहा कि प्रशिक्षण ही तकनीकी पहलुओं को विस्तार देता है। मुझे पूरा विश्वास है कि पांच दिवसीय यह कार्यशाला हमारे संस्थान को और गति देगी। केंद्रीय सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष प्रो. अजय जैतली ने विस्तार से बात की। कहा कि प्रशिक्षित कर्मचारी ही संस्थाओं के प्राण होते हैं। यह प्रशिक्षण शिविर इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कार्यशैली को और समुन्नत बनाएगी। कुलसचिव प्रो. एन. के शुक्ल ने इस प्रशिक्षण कार्यशाला पर खुशी ज़ाहिर की।
उनका कहना था कि इस प्रशिक्षण कार्यशाला से निकले कर्मचारी लंबित कार्यों में अब तेजी लायेंगे। उन्हें इस शिविर से कई चुनौतियों से जूझने में मदद मिली होगी। उन्होंने सुझाव दिया कि सभी कर्मचारी घर से जब भी संस्थान आएं तो पूरी ऊर्जा और प्रसन्नता के साथ आएं। क्योंकि कर्मचारियों का उत्साह ही संस्थान का उत्साह होता है, स्वागत वक्तव्य देते हुए प्रो. संतोष भदौरिया ने बताया कि प्रशिक्षण पारदर्शी कार्य संस्कृति के उत्प्रेरक होते हैं। सुखद यह है कि यहां उपस्थित सभी कर्मचारी इस बात को महसूस कर रहें हैं।
गांधी विचार एवं शांति अध्ययन संस्थान के बतौर निदेशक प्रो. संतोष भदौरिया जी ने सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह और पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया। राजभाषा अनुभाग के अनुवाद अधिकारी हरिओम कुमार ने पांच दिन की रिपोर्ट और गतिविधियों का संक्षिप्त ब्यौरा प्रस्तुत किया और पोस्ट डॉक्टोरल फेलो डॉ. धीरेंद्र प्रताप सिंह ने सभी अतिथियों और कर्मचारियों के प्रति आभार ज्ञापित किया। सभी अतिथियों ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय की माननीय कुलपति महोदया का आभार प्रकट किया।
कार्यक्रम में हरिओम कुमार ने गांधी विचार एवं शांति अध्ययन संस्थान के कर्मचारियों और कार्यशाला में सहयोग प्रदान करने वाले पोस्ट डॉक्टोरल फेलो डॉ. धीरेंद्र प्रताप सिंह, परास्नातक के छात्र कुंजबिहारी, राहुल कुमार आदि के सहयोग प्रति आभार प्रकट किया। प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे कर्मचारियों के यह उत्साहजनक रहा कि गांधी विचार एवं शांति अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रशिक्षण स्थल पर पूरे दिन मौजूद रहते थे, उनका सानिध्य मिलता था और प्रशिक्षण कार्यशाला के संयोजक हिंदी अनुवाद अधिकारी हरिओम कुमार और गांधी भवन के सभी कर्मचारी पूरी तत्परता से सहयोगात्मक भूमिका में मौजूद रहते थे।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय की यह कार्यशाला इस मामले में विशिष्ट थी कि प्रयागराज के समस्त केंद्रीय कार्यालयों में पांच दिवसीय कार्यशाला कराने वाला यह प्रथम केंद्रीय विश्वविद्यालय बना। इस कार्यशाला में कार्यालय के कामकाज से संबंधित न केवल तकनीकी और राजभाषा संबंधी नियमों संबंधी पहलुओं पर विशिष्ट व्याख्यान हुये बल्कि हास्य योग और हल्के व्यायाम आदि का भी आयोजन हुआ, आयोजन के उद्घाटन अवसर पर नवनियुक्त
और प्रोन्नत कर्मचारियों को राजभाषा कार्यान्वयन समिति के अध्यक्ष एवं कुलसचिव प्रो. नरेंद्र कुमार शुक्ल, प्रो. पंकज कुमार, डीन( सीडीसी) और राजभाषा कार्यान्वयन समिति के संयोजक एवं गांधी विचार एवं शांति अध्ययन संस्थान के निदेशक, प्रो. संतोष भदौरिया का सानिध्य मिला था। पहले दिन विषय विशेषज्ञ के तौर पर प्रो. ए. आर. सिद्दिकी(भूगोल विभाग), प्रो. आशीष खरे (अध्यक्ष, आइसीटी सेल), श्री ए. के. सिंह(उप कुलसचिव) ने अपनी बात रखी। दीप प्रज्जवलन के पश्चात इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने कहा कि हमें अपनी कार्यशैली को भी प्रोन्नत करना होगा।
तेजी से बदलती हुई तकनीक को आत्मसात करते हुए हमें अपने कार्यों में भी तेजी लानी होगी। प्रो. पंकज कुमार ने इस तरह के ज़रूरी प्रशिक्षण कार्यशाला को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि सीखने सिखाने की कोई उम्र नहीं होती है। हम सबमें जीवन के अंतिम क्षण तक कुछ नया जानने की जिज्ञासा बनी रहनी चाहिए। कुछ कर्मचारी भले ही कुछ दिनों में सेवानिवृत्त हो जायेंगे लेकिन यहां लिया गया प्रशिक्षण उनकी पीढ़ियों को समृद्ध करेगा। प्रो. संतोष भदौरिया ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के नवनियुक्त और प्रोन्नत कर्मचारियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सभी कर्मचारी सीखना चाहते हैं।
गुणवत्ता पूर्ण कार्यसंस्कृति में विश्वास रखते हैं। हमारी कोशिश है कि जब इस कार्यशाला के पांच दिन पूरे हों तो हम यह कह सकें कि यहां से कर्मचारियों को कार्यसंस्कृति में एक नई दिशा मिली है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इतना ज़रूरी और सुंदर आयोजन की अनुमति और प्रोत्साहन कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव जी के दूरदृष्टि को ज़ाहिर करता है। उद्घाटन कार्यक्रम के बाद विषय विशेषज्ञों ने अपने-अपने विषयों से संबंधित विस्तार से बात की, प्रशिक्षण कार्यशाला के दूसरे दिन के सत्र का आरंभ योग अभ्यास से हुआ।
हिंदी विभाग के डॉ. सुजीत कुमार सिंह ने गांधी विचार एवं शांति अध्यन संस्थान के गांधी मंडपम में 40 कर्मचारियों के साथ जब योग आरम्भ किया तो एक सकारात्मक ऊर्जा चारों ओर फैल गई। गांधी संस्थान की शांति और योग की ऊर्जा की चमक कर्मचारियों के चेहरे पर साफ दिख रही थी। विभिन्न योग आसन के साथ ओम की ध्वनि से मंडपम सकारात्मक ऊर्जा से भर गया। इसी सकारात्मक ऊर्जा के साथ कर्मचारी आज के दूसरे सत्र में व्यक्तित्व विकास, एकाग्रता, बुद्धि कौशल को जानने के लिए मंडपम से सभागार में आये तो शारीरिक शिक्षा विभाग की प्रोफेसर अर्चना चहल ने परिवार के विभिन्न उदाहरण देते हुए
एकाग्रता और बुद्धि कौशल की जानकारी कब दे दी ये पता ही नहीं चला और साथ ही कर्मचारी तनाव के विभिन्न कारणों को जान पाए। अर्चना चहल जी ने बड़ी ही बारीकी से दैनिक कार्यों के उदाहरण देते हुए सकारत्मक सोचने के लिए प्रेरित किया, भोजनावकाश के बाद दूसरे दिन का तीसरा सत्र जब आरम्भ हुआ तो मनोविज्ञान विभाग की डॉ. रितु मोदी ने कार्यक्षेत्र में मानसिक संतुलन, व्यवहार आदि पर पीपीटी के माध्यम से रोचक जानकारी कर्मचारियों से साझा की।
हर कर्मचारी से जब बात की तो उसके तनाव को दूर करने के लिए विभिन्न एक्सरसाइज करने की जानकारी दी। इस सत्र का समापन हंसी के अभ्यास के साथ पूरा हुआ और लोगों ने जाना कि हँसना इतना आसान नहीं है। आखिरी और चतुर्थ सत्र टाइपिंग एवं फॉन्ट संबंधित समस्यायों के निवारण का रहा जिसे राजभाषा अनुभाग के अनुवाद अधिकारी हरिओम कुमार और आई.सी.टी सेल के कर्मचारी शिवम ने पूरा किया, कार्यशाला के तीसरे दिन के प्रथम सत्र का आरंभ हास्य योग अभ्यास से हुआ। सभी कर्मचारियों ने गांधी मंडपम के चारो ओर जोर से हंसते हुए अपनी ध्वनि से गांधी मंडपम और उद्यान को गुंजायमान कर दिया। उसके बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ बी. के. सिंह ने कर्मचारियों को कार्यालयीन कार्यों में तकनीक के प्रयोग और उसकी चुनौतियों से अवगत कराया।
कार्यालयीन कार्यों में प्रयोग होने वाले विभिन्न सॉफ्टवेयर, एप्लिकेशन का परिचय देते हुए कहा कि आप तकनीक से भागिए नहीं उसे जानिए, सीखिए। बार-बार प्रयोग कीजिये एक दिन कब आप सीख जाएंगे ये आप को पता भी नहीं चलेगा। भारत सरकार के विभिन्न डिजिटल प्लेटफार्म का वर्णन करते हुए, इविवि में प्रयुक्त तकनीक के प्रयोग पर भी कर्मचारियों की दुविधा को दूर किया, तकनीक की बारीकी को समझते हुए कर्मचारियों ने तीसरे दिवस के दूसरे सत्र में वर्ड, एक्सेल और विभिन्न कार्यालयी सॉफ्टवेर की जानकारी हासिल की। जिसे इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सूचना वैज्ञानिक श्री सुधाकर मिश्रा से प्राप्त की। कार्यालयी कार्यों हेतु वर्ड की उपयोगिता उसके उपयोग और विभिन्न शार्टकट के बारे में जानते हुए हिंदी के विभिन्न सॉफ्टवेयर को इंस्टाल करना जाना, भोजनावकाश के पश्चात तीसरा सत्र कार्यालयीन कार्यों में प्रयुक्त होने वाले विविध टूल्स के नाम रहा। स्मार्ट फोन की आवश्यकता और उसके कार्यालयीन कार्यों के लिए उपयोग की जानकारी राजभाषा अनुभाग के हिंदी अनुवाद अधिकारी श्री हरिओम कुमार ने कर्मचारियों से साझा की। वॉइस टाइपिंग को खेल-खेल में कर्मचारियों ने जाना और स्वयं अपने मोबाइल में इसे प्रयोग किया। साफ्टवेयर इंस्टाल करने में आई.सी.टी सेल के श्री शिवम ने सभी की मदद की।
कर्मचारियों ने हिंदी के विभिन्न एप्लिकेशन के बारे में जाना और उसे अपने मोबाइल में इंस्टाल करके प्रयोग भी किया। कुछ कर्मचारी जिनके पास स्मार्ट फोन नहीं था, उन्होंने भी जब इसको देखा और समझा तो स्वयं आकर उन्होंने मंच से नई तकनीक को सराहा और प्रयोग करके दिखाया। आखिरी और चतुर्थ सत्र में कर्मचारियों ने विधि, कानून और उसके प्रयोग को विस्तार से समझा। सरकारी कर्मचारियों को किन नियमों और अधिनियमों का ध्यान सेवा के दौरान रखना है और उनके अधिकार और कर्तव्य क्या हैं?
साइबर अपराध और सुरक्षा से संबंधी विषय पर भी विस्तार से जानकारी इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विधि अधिकारी डॉ. पीयूष मिश्रा ने प्रदान की, प्रशिक्षण कार्यशाला के चतुर्थ दिवस भी हास्य योग और हल्के व्यायाम के बाद आरंभ हुई। सभी कर्मचारियों ने गांधी मंडपम के चारो ओर जोर से हंसते हुए गांधी उद्यान का चक्कर लगाया और उनकी ध्वनि से गांधी मंडपम और उद्यान गूंज उठा। उसके बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग के प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह ने कर्मचारियों को राजभाषा हिंदी, प्रारूप, हिंदी और तकनीक आदि विषय पर जानकारी प्रदान की।
शब्दों का निर्माण, शब्दों का बनना और उसके चलन पर कर्मचारियों से परिचर्चा की। शब्दों के विभिन्न अर्थ पर भी कर्मचारियों के साथ चर्चा की। साथ ही राजभाषा के विभिन्न नियम तथा अधिनियम से सभी को परिचित कराया। दूसरे सत्र में राजभाषा की अवधारणा एवं मानकीकरण की जानकारी इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग की सहायक आचार्य डॉ. अमृता जी से प्राप्त की। केंद्रीय कार्यालयों में राजभाषा के प्रचार- प्रसार के लिए विभिन्न आयामों की बात करते हुए शब्दों की एकरूपता रखने के लिए किए गए मानकीकृत शब्दों की चर्चा आज के विषय विशेषज्ञ ने कर्मचारियों से की।
राष्ट्रभाषा, मातृभाषा एवं राजभाषा पर चर्चा करते हुए देवनागरी अंको के अंतरराष्ट्रीय स्वरूप के बारे में बताया। तीसरा सत्र नोटिंग, ड्राफ्टिंग, कार्यालयीन पत्र लेखन, रिपोर्ट लेखन, नोट शीट लेखन से संबंधित रहा। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग के सहायक आचार्य डॉ. सुनील कुमार सुधांशु ने कार्यालयीन पत्रावली की जानकारी कर्मचारियों से साझा की। कार्यालय की भाषा और आम बोलचाल की भाषा में अंतर को बताते हुए प्रशासन के विभिन्न शब्दों और उनके हिंदी रूप की जानकारी कर्मचारियों को दी। सरकारी पत्र, अर्ध सरकारी पत्र,व्यक्तिगत पत्र के बारे में बताते हुए नोटिंग लिखने का अभ्यास कराया।
राजभाषा की अवधारणा को उन्होंने अपने व्याख्यान में और विस्तार दिया। चतुर्थ सत्र में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग की सहायक आचार्य डॉ. मीना कुमारी ने मातृभाषा और व्यक्तित्व विकास पर कर्मचारियों के साथ परिचर्चा की। मातृभाषा की चर्चा करते हुए आगे उन्होंने प्रशासन में प्रयोग होने वाले शब्दों के बारे में बताया। एक ही शब्द के विभिन्न प्रयोग और उनके अनेक अर्थ भिन्न- भिन्न कैसे हो जाते हैं इसके बारे में विस्तार से चर्चा की, प्रशिक्षण कार्यशाला के अंतिम दिन फाइल प्रबंधन के बारे में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव श्री देवेश कुमार गोस्वामी ने कर्मचारियों से परिचर्चा की।
फाइल को नंबर किस तरह से देना है, किस तरह से सही पृष्ठांकन होता है तथा हस्ताक्षर का क्रम क्या होता है आदि के बारे में विस्तार से बताया। इसके बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भू विज्ञान विभाग के डॉ प्रकाश कुमार सिंह ने वर्ड, एक्सल, पीपीटी, ई मेल और डिजिटल सिग्नेचर पर चर्चा की, अपराह्न सत्र में समापन समारोह के अवसर पर कर्मचारियों ने साहित्यिक और सांस्कृतिक प्रस्तुति भी दी। उक्त अवसर पर अध्यक्षता और मुख्य अतिथि के तौर पर विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. शेखर श्रीवास्तव,
विशिष्ट अतिथि के तौर पर कुलसचिव और राजभाषा कार्यान्वयन समिति के अध्यक्ष प्रो. नरेंद्र शुक्ल, केंद्रीय सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष प्रो. अजय जैतली उपस्थित थे। स्वागत वक्तव्य गांधी विचार एवं शांति अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रो. संतोष भदौरिया ने दिया। समापन अवसर पर मुख्य अतिथि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता, विज्ञान संकाय प्रो. शेखर श्रीवास्तव ने कहा कि कार्यालयीन कार्यों के पंख होते हैं प्रशिक्षित कर्मचारी। उन्होंने कर्मचारियों से आग्रह किया कि आप सब तकनीक पहलुओं से बखूबी परिचित हों।
जिससे सुरक्षित और तेज कार्य संस्कृति विकसित हो। अभी हमें ई-फाइलिंग और अन्य ज़रूरी कार्यों से भी रूबरू होना है। विशिष्ट अतिथि एवम वित्त अधिकारी प्रो. सुनीलकांत मिश्र ने कहा कि प्रशिक्षण ही तकनीकी पहलुओं को विस्तार देता है। मुझे पूरा विश्वास है कि पांच दिवसीय यह कार्यशाला हमारे संस्थान को और गति देगी। केंद्रीय सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष प्रो. अजय जैतली ने विस्तार से बात की। कहा कि प्रशिक्षित कर्मचारी ही संस्थाओं के प्राण होते हैं। यह प्रशिक्षण शिविर इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कार्यशैली को और समुन्नत बनाएगी। कुलसचिव प्रो. एन. के शुक्ल ने इस प्रशिक्षण कार्यशाला पर खुशी ज़ाहिर की।
उनका कहना था कि इस प्रशिक्षण कार्यशाला से निकले कर्मचारी लंबित कार्यों में अब तेजी लायेंगे। उन्हें इस शिविर से कई चुनौतियों से जूझने में मदद मिली होगी। उन्होंने सुझाव दिया कि सभी कर्मचारी घर से जब भी संस्थान आएं तो पूरी ऊर्जा और प्रसन्नता के साथ आएं। क्योंकि कर्मचारियों का उत्साह ही संस्थान का उत्साह होता है, स्वागत वक्तव्य देते हुए प्रो. संतोष भदौरिया ने बताया कि प्रशिक्षण पारदर्शी कार्य संस्कृति के उत्प्रेरक होते हैं। सुखद यह है कि यहां उपस्थित सभी कर्मचारी इस बात को महसूस कर रहें हैं।
गांधी विचार एवं शांति अध्ययन संस्थान के बतौर निदेशक प्रो. संतोष भदौरिया जी ने सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह और पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया। राजभाषा अनुभाग के अनुवाद अधिकारी हरिओम कुमार ने पांच दिन की रिपोर्ट और गतिविधियों का संक्षिप्त ब्यौरा प्रस्तुत किया और पोस्ट डॉक्टोरल फेलो डॉ. धीरेंद्र प्रताप सिंह ने सभी अतिथियों और कर्मचारियों के प्रति आभार ज्ञापित किया। सभी अतिथियों ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय की माननीय कुलपति महोदया का आभार प्रकट किया।
कार्यक्रम में हरिओम कुमार ने गांधी विचार एवं शांति अध्ययन संस्थान के कर्मचारियों और कार्यशाला में सहयोग प्रदान करने वाले पोस्ट डॉक्टोरल फेलो डॉ. धीरेंद्र प्रताप सिंह, परास्नातक के छात्र कुंजबिहारी, राहुल कुमार आदि के सहयोग प्रति आभार प्रकट किया। प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे कर्मचारियों के यह उत्साहजनक रहा कि गांधी विचार एवं शांति अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रशिक्षण स्थल पर पूरे दिन मौजूद रहते थे, उनका सानिध्य मिलता था और प्रशिक्षण कार्यशाला के संयोजक हिंदी अनुवाद अधिकारी हरिओम कुमार और गांधी भवन के सभी कर्मचारी पूरी तत्परता से सहयोगात्मक भूमिका में मौजूद रहते थे।

