बुन्देलखण्ड राष्ट्र समिति ने मनाई सुभाष चंद्र बोस जयंती

फतेहपुर: बुंदेलखंड राष्ट्र समिति द्वारा हरदो में समिति के ऐरायां विकास खंड कार्यालय में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आज जयंती मनाई गई,स्वयंसेको ने समिति के केंद्रीय अध्यक्ष प्रवीण पाण्डेय के नेतृत्व में नेता जी के चित्र पर पुष्प अर्पित किया और आजादी के लड़ाई में उनके योगदान को याद किया गया, बुंदेलियों ने बुंदेलखंड राज्य निर्माण हेतु प्रधानमंत्री मोदी को छब्बीसवी बार खून से पत्र लिखा l

।समिति द्वारा बुंदेलखंड राज्य निर्माण जल जंगल जमीन बचाने हेतु लगातार जन जागरूकता चलाया जा रहा है, केंद्रीय अध्यक्ष प्रवीण पाण्डेय ने कहा कि सुभाष चंद्र बोस स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेता थे l सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा में कटक में हुआ था l नेताजी ने देश की आजादी के लिए आजाद हिंद फौज का गठन किया था l तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा..! का नारा बुलंद करने वाले सुभाष चंद्र बोस आज भी लोगों के दिलों में बसते हैं l

सुभाष चंद्र बोस 24 साल की उम्र में इंडियन नेशनल कांग्रेस से जुड़ गए थे l राजनीति में कुछ वर्ष सक्रिय रहने के बाद उन्होंने महात्मा गांधी से अलग अपना एक दल बनाया. उन्होंने आजाद हिंद फौज का गठन किया l सुभाष चंद्र बोस के क्रांतिकारी विचारों से प्रभावित होकर कई युवा आजाद हिंद फौज में शामिल हुए और देश की आजादी में अपना योगदान दिया l नेता जी के विचार आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करते हैं lसुभाष चंद्र बोस ने कहा थ

ा ”याद रखिए सबसे बड़ा अपराध अन्याय सहना और गलत के साथ समझौता करना है l समिति इसी वाक्य को अनुसरण कर लगातार संघर्ष कर रही है, खून से पत्र लिखने वालों में मुख्यरूप से प्रवीण पाण्डेय , पुस्पेंद्र सैनी , बच्चा तिवारी , धर्मेंद्र सिंह , कपिल कुमार,मंडल कार्यवाह प्रांशु आदित्य , अंकुश त्रिपाठी , सत्यम त्रिपाठी , सनी सिंह ,अमित वर्मा आदि रहे, प्रांशु आदित्य ने अपने विचारों में कहा श्रद्धेय नेता जी का स्मरण करते ही मन उत्साह एवं ऊर्जा से भर जाता है।

उनका अदम्य साहस ना केवल भारतीयों को बल्कि विदेशी महाशक्तियों को अपनी ओर आकर्षित कर लेता था, अंकुश त्रिपाठी ने कहा कि 21 अक्टूबर 1943 को नेताजी ने आज़ाद हिंद फौज के सर्वोच्च सेनापति के अधिकार से स्वतंत्र भारत की प्रथम सरकार बनायी एवं स्वयं भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बनें। जर्मनी, जापान, फिलीपींस, कोरिया, चीन, इटली, मान्चुको और आयरलैंड सहित 11 देशो की सरकारों ने इस नेताजी के नेतृत्व की सरकार को समर्थन दिया।

जापान ने अंडमान व निकोबार द्वीप इस अस्थायी सरकार को दे दिये, बच्चा तिवारी ने कहा कि श्रद्धेय नेताजी के विचारों को जब भी एक युवा के रूप में सुनने एवं पढ़ने का अवसर मिलता है तो लगता है वह एक विशेष उद्देश्य लेकर अवतरित हुए महापुरूष थें, “अगर संघर्ष न रहे, किसी भी भय का सामना न करना पड़े, तब जीवन का आधा स्वाद ही समाप्त हो जाता है।”
रिपोर्ट वी के द्विवेदी 

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