फतेहपुर: जानकारी के मुताबिक विजयीपुर विकासखंड की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत गढ़ा से ठीक ऐसा ही मामला सामने आया है जहा पर प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली किस्त तो आ गई लेकिन दूसरी किस्त रिश्वत का चढ़ावा न चढ़ पाने की वजह से बीच में अटक गई और अब परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है
बताया जा रहा है कि ग्राम पंचायत गढ़ा के गांव गढ़ा खास में सोनम देवी पत्नी संतोष कुमार को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास मुहैया हुआ था आज से करीब 6 महीने पहले परिवार को आवास योजना की पहली किस्त मिल गई लेकिन 6 महीने बीत जाने के बाद इस परिवार को आवास योजना की दूसरी किस्त नहीं मिली जिससे परिवार खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर है संतोष कुमार ने बताया
कि आज से करीब 6 माह पहले प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली किस्त मिली थी जिसमें ₹10000 है ग्राम प्रधान ने ले लिए इसके बाद से अभी तक दूसरी किस्त नहीं आई और अब दूसरी किस्त के लिए ₹20000 की मांग की जा रही है मेरे पास पैसे ना होने की वजह से मैं पैसे नहीं दे पा रहा हूं
जिस वजह से मेरी दूसरी किस्त रोक दी गई है पीड़ित ने यह भी बताया कि मैं कई बार ब्लॉक के चक्कर लगा चुका हूं लेकिन कोई भी सुनने को तैयार नहीं है और हर जगह मुझसे पैसे मांगे जा रहे हैं जिस वजह से मेरी की दूसरी किस्त रोक दी गई है पीड़ित परिवार के छोटे-छोटे बच्चे भी हैं जो इस कड़ाके की ठंड में तिरपाल व पन्नी के नीचे रात काटने को मजबूर हैं।
बताया जा रहा है कि ग्राम पंचायत गढ़ा के गांव गढ़ा खास में सोनम देवी पत्नी संतोष कुमार को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास मुहैया हुआ था आज से करीब 6 महीने पहले परिवार को आवास योजना की पहली किस्त मिल गई लेकिन 6 महीने बीत जाने के बाद इस परिवार को आवास योजना की दूसरी किस्त नहीं मिली जिससे परिवार खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर है संतोष कुमार ने बताया
कि आज से करीब 6 माह पहले प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली किस्त मिली थी जिसमें ₹10000 है ग्राम प्रधान ने ले लिए इसके बाद से अभी तक दूसरी किस्त नहीं आई और अब दूसरी किस्त के लिए ₹20000 की मांग की जा रही है मेरे पास पैसे ना होने की वजह से मैं पैसे नहीं दे पा रहा हूं
जिस वजह से मेरी दूसरी किस्त रोक दी गई है पीड़ित ने यह भी बताया कि मैं कई बार ब्लॉक के चक्कर लगा चुका हूं लेकिन कोई भी सुनने को तैयार नहीं है और हर जगह मुझसे पैसे मांगे जा रहे हैं जिस वजह से मेरी की दूसरी किस्त रोक दी गई है पीड़ित परिवार के छोटे-छोटे बच्चे भी हैं जो इस कड़ाके की ठंड में तिरपाल व पन्नी के नीचे रात काटने को मजबूर हैं।
रिपोर्ट वी के द्विवेदी, ब्यूरो चीफ

