Hamirpur News: यमुना के बाद बेतवा ने भी पार किया खतरे का निशान, बाढ़ से किसान तबाह

हमीरपुर:- जिले में यमुना व बेतवा के साथ केन नदी के बढ़ते जल स्तर ने कहर ढाना शुरू कर दिया है। यमुना, बेतवा की बाढ़ के चलते जहां हजारों बीघे में बोई गई खरीफ फसलें जल मग्न हो गई वहीं कुरारा क्षेत्र के करीब दो दर्जन गांवों में पानी घुसने से लोग सड़कों या अन्य स्थानों पर डेरा जमाने का मजबूर है। वहीं केन में आई बाढ़ के चलते मौदहा क्षेत्र गढ़ा गांव टापू बनकर रह गया है। इसके अलावा मुख्यालय से टिकरौली मार्ग व कुरारा क्षेत्र में पारा से कंडौरा मार्ग में बने रपटे में बेतवा का पानी भर जाने से आवागमन बंद हो गया है। बाढ़ ग्रस्त इलाकों में प्रशासन अपनी नजरे बनाए है।

लोगों के ठहरने की व्यवस्था कराने में जुटा है। वहीं माताटीला बांध से बेतवा में छोड़े गए डेढ़ लाख क्यूसेक पानी से शनिवार तक जल स्तर दो मीटर और बढ़ने की संभावना है। वहीं यमुना के रात 12 बजे तक स्थिर होने की संभावना जताई जा रही है। मौजूदा में दोनों नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। 
शुक्रवार शाम बजे समुद्र तल से 105.47 मीटर ऊपर यमुना व 104.62 मीटर बेतवा का जल स्तर दर्ज किया गया। यमुना का मौजूदा जल स्तर जहां खतरे के निशान से करीब दो मीटर अधिक है। वहीं बेतवा खतरे के निशान से आठ सेमी ऊपर बह रही है।

मौदहा बांध के अधिशाषी अभियंता करन पाल सिंह के अनुसार बेतवा में शुक्रवार शाम चार बजे ड़ेढ़ लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इसके अलावा तीन चार घंटे बाद और 50 हजार क्यूसेक पानी छोड़ने की सूचना दी गई है। जिसके शनिवार दोपहर बाद मुख्यालय पहुंचने की संभावना है। जिससे बेतवा का जल स्तर खतरे के निशान से दो मीटर और बढ़ने की संभावना है। वहीं औरेया में यमुना के पांच बजे तक स्थिर होने की सूचना है। जिसके कारण शुक्रवार रात 12 बजे के बाद मुख्यालय में यमुना के स्थिर होने की संभावना है। तब तक यमुना के 106 मीटर पार करने की संभावना है। 
बाढ़ से तबाही   
जिले के कई गांवों में यमुना-बेतवा नदियों का पानी घुसने से भारी तबाही हुई है।

कच्चा आशियाना बना गुजर बसर करने वाले गरीब सड़क किनारे डेरा जमाए है। मुख्यालय के केसरिया डेरा, ब्रम्हा का डेरा, मेरापुर आदि में पानी बिल्कुल निकट है। वहीं बेतवा किनारे बसे जरैली मडैया, चंदुलीतीर व शंकरी पीपल के निकट गांवों में पानी भर जाने से ग्रामीणों ने राठ मार्ग में अपना डेरा जमा लिया हैै। वहीं तटवर्ती गांवों में खेतों में पानी भर जाने से हजारों बीघे जमीन में बोई गई खरीफ की फसल नष्ट हो गई।   
केन ने भी बरपाया कहर 
 केन नदी के बढ़ते जलस्तर से वहां के आस-पास के गांव में बाढ़ की संभावना बढ़ रही है। वहीं सिसोलर और गढ़ा के बीच संपर्क मार्ग में बना रप्टा केन नदी के पानी से डूब गया। जिसमें इस गांव का संपर्क भी पूरे क्षेत्र से कट गया और यह टापू बन गया है।

मौके पर पुलिस व राजस्व विभाग की टीमें लगाई गई हैं आवश्यक सेवाओं के लिए नाव भी संचालित की गई है। वहीं यमुना और बेतवा की बाढ़ के चलते तहसील क्षेत्र के एक दर्जन गांव प्रभावित हुए है। अभी तक नदियों का पानी किसी गांव के निकट तक तो नहीं पहुंचा लेकिन हजारों बीघा खरीफ की फसल मूंग ,उड़द, तिल, ज्वार ,बाजरा नष्ट हो गई। यदि नदी और बढ़ती है तो भुलसी, छानी, बैजेमऊ, गढ़ा, शिवरामपुर ,बक्शा आदि गांव के निचले इलाकों में पानी भरने की संभावना बढ़ रही है। एसडीएम राजेश कुमार चौरसिया ने बताया कि सभी स्थानों पर बाढ़ चौकियां अलर्ट कर दी गई है। फिलहाल बाढ़ का खतरा नहीं है। वहीं गढ़ा के निकट पुलिस तैनात कर दी गई है और आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया गया है।

 
बाढ़ का पानी पहुंचने से बंद हुए मार्ग 
मुख्यालय से टिकरौली होकर पत्यौरा, देवगांव को जाने वाले मार्ग में टिकरौली गांव के निकट संपर्क मार्ग में पानी भर जाने से आवागमन बंद हो गया है। ऐसे में लोगों को सुमेरपुर होकर मुख्यालय आना पड़ेगा। वहीं कुरारा क्षेत्र के पारा गांव से कंडौर गांव को जाने वाले मार्ग में बने रपटे पर बेतवा नदी का पानी आ जाने से आवागमन बंद हो गया। संवाद सूत्र कुरारा के अनुसार यमुना के उफान से क्षेत्र के गांव मनकी खुर्द व मनकी कला, हरौलीपुर, भौली, कोतूपुर पटिया, सिकरोड़ी, शेखूपुर, बचरौली आदि गांवों में पानी पहुच गया है। जिसके चलते ग्रामीणों ने अपने जानवरो व परिवारीजनों के साथ गांव के बाहर ऊंचाई वाली जगहों में डेरा डाल लिया है। 


फिर ढहे कच्चे आशियाने 
मुख्यालय के शंकरी पीपल निवासी तारा देवी हो या कुरारा क्षेत्र के मनकी गांव निवासी रामसिंह सभी के चेहरों में आशियाना मिटने का दुख दिखाई दिया। उनके अनुसार बीते वर्ष 2020 में आई बाढ़ में भी उनके मकान धराशायी हो गए थे। किसी तरह मेहनत मजदूरी कर उन्हें बना फिर परिवार के साथ खुश थे। लेकिन बाढ़ ने उन्हें फिर तबाह कर दिया। मनकी गांव के भीमसिंह, सिकरोड़ी गांव निवासी पवन कुमार आदि ने बताया कि जिन लोगो के पक्के मकान है उन लोगो ने तो अपनी छतों में समान रख लिया है। लेकिन उनके मकान कच्चे होने से उन्हें हर बार मुसीबत झेलनी पड़ती है। बताया कि मजदूरी कर दो-चार माह के लिए इकठ्ठा किया गल्ला, भूसा आदि भी बाढ़ से बर्वाद हो गया।
रिपोर्ट राशिद अली, संवाददाता

संपादक के बारे में

Scroll to Top