आपको बता दें शिक्षा मंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी के भाई अरुण द्विवेदी की नियुक्ति गरीब कोटे के अंतर्गत असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर हुई थी यह मामला सोशल मीडिया में एक चर्चा का विषय रहा,इस मामले को लेकर प्रदेश की कई हस्तियों ने प्रमाण पत्र की जांच की मांग भी उठाई थी। बताया जा रहा है कि सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए करीब 150 आवेदन प्राप्त हुए थे। जिसमें मेरिट के आधार पर 10 आवेदकों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था। जिसमें शिक्षा मंत्री के भाई अरुण द्विवेदी का नाम भी सूची में दूसरे नंबर पर था।असिस्टेंट पद पर नियुक्ति के बाद सोशल मीडिया में मंत्री के भाई को बधाई देने का सिलसिला शुरू हुआ तो उसके बाद कुछ देर बाद सोशल मीडिया में आलोचनाएं भी होने लगी।
वही भाई अरुण द्विवेदी की नियुक्ति पर जब विवाद हुआ तो उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी ने भी सफाई दी, और कहा कि जिसको नियुक्ति मामले में आपत्ति हो वह जांच करवा सकता है। भाई ने एक अभ्यार्थी के रूप में आवेदन किया,और सिद्धार्थ विश्वविद्यालय ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए चयन भी किया, मैं शिक्षामंत्री हूं,लेकिन इस मामले को लेकर मेरा कोई भी हस्तक्षेप नहीं है।

