◼️90 के दशक से मंदिर में पड़ा था ताला
कानपुर:- में तलाक महल के पास प्राचीन राधा कृष्ण मंदिर के ढहने के मामले में पुलिस को अभी तक किसी प्रकार की साजिश के तथ्य नहीं मिले पाये हैं। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर यह स्पष्ट हुआ है कि मंदिर जर्जर होने की वजह से खुद ही ढह गया। मंदिर तीन दशकों से बंद पड़ा था।
इसके पीछे की एक बड़ी वजह थी। मंदिर जिस जमीन पर बना था उसके मालिक ने बातचीत में पूरी जानकारी दी। मंदिर के मालिक आजाद नगर निवासी अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि मंदिर करीब डेढ़ सौ साल पुराना है। मंदिर उनकी पुस्तैनी जमीन पर था।,अनिल बताते हैं कि सन 1931 में कानपुर में दंगे हुए थे। तब उनका पूरा परिवार बजरिया से पलायन कर आजाद नगर चला गया था। दंगे के बाद पुश्तैनी मकान वीरान हो गया था। किंतु मंदिर खुला था। 1994 में जब उन्होंने मंदिर की मरम्मत कराने का प्रयास किया तो वहां पर चाय की दुकान लगाने वाले यासीन ने खुद को किरायेदार बता कर इसका विरोध किया था।,उसने मंदिर के सामने कब्जा कर रखा था। कोर्ट में परिवाद भी दाखिल कर दिया। अनिल ने बताया कि केस की वजह से मंदिर की मरम्मत नहीं कराई जा सकी थी। इसलिए वो जर्जर होता चला गया और ढह गया।परन्तु विवाद की वजह से मंदिर में आज तक ताला लटका हुआ था।
32 मंदिर खत्म हो गए, जमीनें कब्जा ली गईं,अनिल कुमार ने बताया कि उनका खानदान अत्यधिक बड़ा है। सुखईलाला चौराहा उनके ही परिवार के सदस्य के नाम पर है। उन्होंने बताया कि एक समय था। जब बजरिया समेत आसपास क्षेत्र में 32 मंदिर हुआ करते थे। जिनकी देखरेख उनके ही परिवार वाले करते थे। मगर दंगों के बाद जैसे जैसे समय गुजरा मंदिर खत्म होते गए। अधिकतर मंदिरों की जमीन पर कब्जे हो गए। आज उनका नामोनिशान तक मिट गया है।
By Vinay Mishra

