हवन यज्ञ व भंडारे के साथ हुआ श्रीमद भागवत कथा का हुआ समापन
फतेहपुर/अमौली :- अमौली विकास खंड के रुस्तमपुर गांव में चल रही नौ दिवसीय भागवत कथा रविवार को संपन्न हो गई, कथा के समापन में हवन यज्ञ और भंडारे का आयोजन किया गया। भारी संख्या में ग्रामीण व श्रद्धालुओं ने पहले हवन यज्ञ में आहुति डाली और फिर प्रसाद ग्रहण कर पुण्य कमाया, भागवत कथा का आयोजन समस्त ग्रामवासियों की ओर से करवाया गया था।
कथा बॉल्याव्यास कु० अन्जू शास्त्री जी ने नौ दिन तक चली कथा में भक्तों को श्रीमद भागवत कथा की महिमा बताई, उन्होंने लोगों से भक्ति मार्ग से जुड़ने और सत्कर्म करने को कहा,
बॉल्याव्यास कु० अन्जू शास्त्री जी ने कहा कि हवन-यज्ञ से वातावरण एवं वायुमंडल शुद्ध होने के साथ-साथ व्यक्ति को आत्मिक बल मिलता है। व्यक्ति में धार्मिक आस्था जागृत होती है। दुर्गुणों की बजाय सद्गुणों के द्वार खुलते हैं। यज्ञ से देवता प्रसन्न होकर मनवांछित फल प्रदान करते हैं। उन्होंने बताया कि भागवत कथा के श्रवण से व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है। श्रीमद भागवत से जीव में भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य के भाव उत्पन्न होते हैं। इसके श्रवण मात्र से व्यक्ति के पाप पुण्य में बदल जाते हैं। विचारों में बदलाव होने पर व्यक्ति के आचरण में भी स्वयं बदलाव हो जाता है। कथावाचक बॉल्याव्यास कु० अन्जू शास्त्री जी ने भंडारे के प्रसाद का भी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि प्रसाद तीन अक्षर से मिलकर बना है। पहला प्र का अर्थ प्रभु, दूसरा सा का अर्थ साक्षात व तीसरा द का अर्थ होता है दर्शन। जिसे हम सब प्रसाद कहते हैं। हर कथा या अनुष्ठान का तत्वसार होता है जो मन बुद्धि व चित को निर्मल कर देता है। मनुष्य शरीर भी भगवान का दिया हुआ सर्वश्रेष्ठ प्रसाद है। भगवान का लगाए गए भोग का बचा हुआ शेष भाग मनुष्यों के लिए प्रसाद बन जाता है। कथा समापन के दिन रविवार को विधिविधान से पूजा करवाई। दिनभर हवन और भंडारा कराया गया। इसमें समस्त आस पास के आये हुए लोगो ने आहुति डाली। गांव के सभी श्रद्धालुओं ने भी हवन में आहुति डाली। पूजन के बाद भंडारा लगाकर प्रसाद बांटा गया। सभी ग्रामवासियों ने दूर दूर से आए हुए भक्तों के प्रति अभार व्यक्त किया। इस मौके पर हज़ारो भक्त मौजूद रहे, क्षेत्र के आए हुए सभी भक्तों ने भंडारे का प्रसाद छका।
ब्यूरो इंडिपेंडेट इंडिया


