भारत ने सुखोई विमान से ब्रह्मोस मिसाइल का किया परीक्षण(IAF)

भारत ने सुखोई विमान से ब्रह्मोस मिसाइल का किया परीक्षण
भारतीय वायुसेना ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के लड़ाकू विमान से दागे जा सकने वाले प्रारूप का 30 अक्टूबर 2020 को सफल परीक्षण किया. इसे एक सुखोई एमकेआई-30 विमान से बंगाल की खाड़ी में दागा गया. चीन के साथ जारी सीमा विवाद के बीच वायु सेना के लिए इसे अहम उपलब्धि माना जा रहा है.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुखोई-30 विमान ने हवा में ही ईधन भरते हुए बंगाल की खाड़ी का सफर तय किया. विमान ने सुबह लगभग नौ बजे उड़ान भरी थी और इसने दोपहर लगभग 1.30 अपने लक्ष्य पर मिसाइल दाग दी. अपनी उड़ान के दौरान युद्धक विमान ने 3,500 किलोमीटर की दूरी तय की.

मिसाइल की खास बात क्या है?
खास बात ये है कि सुखोई एमकेआई-30 विमान ने करीब तीन घंटे की उड़ान के बाद यह मिसाइल दागी और मिसाइल दागे जाने से पहले आकाश में ही जंगी जहाज में ईंधन भरा गया. मिसाइल ने इस टेस्‍ट में पूरी सटीकता के साथ एक डूबते जहाज को निशाना बनाया और परीक्षण में वांछित नतीजे हासिल किए गए. रिपोर्ट्स के अनुसार, सुखोई एमकेआई-30 विमान ने करीब तीन घंटे की यात्रा की, जिसके बाद यह मिसाइल दागी गई.
ब्रह्मोस मिसाइल का दूसरा परीक्षण
हाल के दिनों में यह ब्रह्मोस मिसाइल का इस तरह का दूसरा परीक्षण है. इससे पहले बंगाल के कलाइकुंडा एयरबेस से उड़ान भरकर अरब सागर में लक्षद्वीप के निकट अपने लक्ष्य को निशाना बनाया था. भारतीय वायु सेना के पास एक विशेष स्क्वाड्रन भी है, जो समुद्री भूमिका में है. यह स्क्वाड्रन तंजावुर में तैनात है.
अक्टूबर में ही ओड़िशा के बालासोर में 400 किलोमीटर से ज्यादा मारक क्षमता वाले ब्रह्मोस मिसाल का सफल प्रायोगिक परीक्षण किया गया था. भारतीय वायुसेना अपने 40 से ज्यादा सुखोई फाइटर जेट्स पर ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों को फिट कर रही है.

जहाज-रोधी मिसाइल का परीक्षण 
भारतीय नौसेना ने 30 अक्टूबर 2020 को बंगाल की खाड़ी में अपने युद्धपोत आइएनएस कोरा से जहाज-रोधी मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया. नौसेना ने ऐसा एक अभ्यास के तहत किया, जो भारत के आसपास रणनीतिक समुद्री क्षेत्र में उसकी युद्धक तैयारियों को दर्शाता है. भारतीय नौसेना ने कहा कि मिसाइल ने अधिकतम सीमा पर स्थित लक्ष्य को बेहद सटीकता से निशाना बनाया.

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