30 नवंबर तक कार्तिक मास, पृथ्वी पर रहेगा देवताओं का वास
लखनऊ
एक नवंबर से शुरू हुआ कार्तिक मास 30 नवंबर तक रहेगा। कार्तिक मास में व्रत त्योहारों की जहां धूम होगी तो दूसरी ओर अनुष्ठान दान-पुण्य, स्नान और दीपदान विशेष फलदायी होगा। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात महारास दर्शन के लिए सभी देवी-देवता पवित्र नदियों व सरोवरों के साथ पृथ्वी पर आते हैं। एक मास तक पृथ्वी पर वास करते हैं। संपूर्ण कार्तिक मास में ब्रह्मचर्य, सत्य, अहिंसा नियम व तप पूरी श्रद्धा करना श्रेयस्कर माना गया है। 25 नवंबर को देवोत्थानी एकादशी के साथ ही शादियों का दौर भी शुरू हो जाएगा। आचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि इस मास में पड़ने वाले व्रत त्योहार विशेष फलदायी होते हैं। इस महीने जो पूजन व व्रत होता है उसका पालन करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण हाेती हैं। यह महीना देवताओं के लिए भी प्रिय माना गया है।
कब क्या होगा
-दो नवंबर-शून्य शयन व्रत
-चार नवंबर-करवा चौथ
-आठ नवंबर-अहोई अष्टमी
-11 नवंबर- एकादशी व्रत
-13 नवंबर-धनतेरस, हनुमान जयंती
-14 नवंबर दीपावली
-15 नवंबर-गाेवर्धन पूजा
-16 नवंबर भाई दूज, चित्रगुप्त जयंती
-18 नवंबर-छठ पूजा की नहाय खाय से शुरुआत
-19 नवंबर-खरना
-20 नवंबर-छठ पूजा
-21 नवंबर छठ का समापन
-22 नवंबर-गाेपाष्टमी
-23 नवंबर-अक्षय नवमी
-25 नवंबर-तुलसी विवाह
-27 नवंबर-प्रदोष व्रत
-29 नवंबर-बैकुंठी चतुर्दशी
-30 नवंबर-कार्तिक पूर्णिमा
करवा चौथ का मुहूर्त
कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी चार नवंबर को है, इसी दिन करवा चौथ व्रत भी होगा। इस दिन करवा चौथ सर्वार्थ सिद्धि व शिव योग में मनाया जाएगा। बुधवार पड़ने के कारण इसकी महत्ता और भी बढ़ गई है, क्योंकि बुधवार का दिन भगवान श्री गणेश को समर्पित होता है। आचार्य अनुज पांडेय ने बताया कि इस दिन सौभाग्यवती स्त्रियां पति के स्वास्थ आयु एवं मंगल कामना के लिए व्रत रखती हैं। यह व्रत सौभाग्य और शुभ संतान देता है। प्रातः काल स्त्रियां स्नान आदि करके आचमन करके सुख सौभाग्य का संकल्प करके व्रत करती हैं। व्रती शिव पार्वती, कार्तिकेय, श्री गणेश व चंद्रमा का पूजन करतीं हैं। शाम 5:21 से 6:39 के बीच करवा चौथ का पूजन का मुहूर्त है जबिक राजधानी में चंद्रता रात 8:01बजे नजर आएगा।
क्या है कथा
इंद्रप्रस्थ नगरी में वेद शर्मा नामक एक विद्वान ब्राहाण के सात पुत्र तथा एक पुत्री थी जिसका नाम वीरावती था। उसका विवाह सुदर्शन नाम एक ब्राहाण के साथ हुआ। ब्राहाण के सभी पुत्र विवाहित थे। एक बार करवाचौथ के व्रत के समय वीरावती की भाभियों ने तो पूर्ण विधि से व्रत किया, लेकिन वीरावती सारा दिन निर्जला व्रत रहकर भूख न सह सकी और उसकी तबियत बिगड़ने लगी। भाइयों ने वीरावती को व्रत खोलने के लिए कहा, लेकिन चंद्रमा देखकर ही व्रत खोलने पर अड़ी रही। भाइयों ने ने बाहर खेतों में जाकर आग जलाई तथा ऊपर कपड़ा तानकर चंद्रमा जैसा दृश्य बना दिया। बहन से कहा कि चांद निकल आया है, अर्घ्य देकर व्रत तोड़ो। नकली चंद्रमा को अर्घ्य देने से उसका व्रत खंडित हो गया। वीरावती का पति अचानक बीमार पड़ गया। वह ठीक न हो सका। इंद्र की पत्नी इंद्राणी करवा चौथ व्रत करने पृथ्वी पर आईं। इसका पता लगने पर वीरावती ने जाकर इंद्राणी से प्रार्थना की कि उसके पति के ठीक होने का उपाय बताएं। इंद्राणी ने कहा कि तेरे पति की यह दशा तेरी ओर से रखे गए करवा चौथ व्रत के खंडित हो जाने के कारण हुई है। यदि तूं करवा चौथ का व्रत पूर्ण विधि विधान से बिना खंडित करेगी तो तेरा पति ठीक हो जाएगा। वीरावती ने करवा चौथ का व्रत पूर्ण विधि पूरा किया और पति बिल्कुल ठीक हो गए। करवा चैथ का व्रत उसी समय से प्रचलित है। द्रोपदी ने भी यह व्रत भगवान कृष्ण के कहने पर किया था।

