पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लि0 के निजीकरण के विरोध में उप्र के बिजली कर्मचारियों

पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लि0 के निजीकरण के विरोध में उप्र के बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों एवं अभियन्ताओं ने किया पूर्ण कार्य बहिष्कार

ब्यूरो/ लखनऊ

निजीकरण पर प्रबन्धन के हठवादी रवैये के चलते बिजलीकर्मी कर रहें हैं आंदोलन।

बिजली व्यवस्था बुरी तरह लड़खड़ाई ऊर्जा मंत्री एवं संघर्ष समिति के साथ वार्ता जारी।
उप्र के पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लि के विघटन/निजीकरण/अन्य संस्थाओं को हैण्डओवर करने के ऊर्जा निगम प्रबन्धन के फैसले के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के बैनर तले समस्त बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों एवं अभियन्ताओं ने प्रदेश के कोने-कोने, समस्त जनपदों एवं परियोजनाओं पर प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन पूर्ण कार्य बहिष्कार प्रारम्भ किया। उप्र के बिजलीकर्मियों के समर्थन में देश भर में केरल, तमिलनाडु, कनार्टक, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, लद्दाख, बिहार, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल सहित अन्य प्रान्तों के कुल 15 लाख बिजलीकर्मियों ने भी कार्य बहिष्कार किया। 
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के मुख्य पदाधिकारियों शैलेन्द्र दुबे, ए के सिंह, प्रभात सिंह, जी बी पटेल, जय प्रकाश, गिरीश पाण्डेय, सुहैल आबिद, महेन्द्र राय, के एस रावत, शशिकान्त श्रीवास्तव, विनय शुक्ला, डी के मिश्रा, परशुराम, ए के श्रीवास्तव, वी के सिंह कलहंस, आर के सिंह, हसमत, राकेश, कपिल मुनि, सुनील प्रकाश पाल, नितिन शुक्ला, राजेन्द्र जी आदि ने कहा कि उप्र ऊर्जा निगम प्रबन्धन द्वारा विगत में दिनांक 05 अप्रैल, 2018 को मा0 ऊर्जा मंत्री पं0 श्रीकान्त शर्मा के साथ हुए समझौते ‘‘उप्र में विद्युत वितरण निगमों की वर्तमान व्यवस्था में ही विद्युत वितरण में सुधार हेतु कर्मचारियों एवं अभियन्ताओं को विश्वास में लेकर सार्थक कार्यवाही की जायेगी। कर्मचारियों एवं अभियन्ताओं को विश्वास में लिये बिना उप्र में किसी भी स्थान पर कोई निजीकरण नही किया जायेगा’’ का आदर/पालन करते हुये पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लि0 के निजीकरण की प्रक्रिया को तत्काल निरस्त करने की पुनः अपील की परन्तु ऊर्जा निगम प्रबन्धन के निजीकरण किये जाने की जिद पर अड़े रहने के कारण प्रदेश के बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों एवं अभियन्ताओं ने व्यापक असंतोष एवं आक्रोश के कारण विगत एक माह से अधिक समय से चल रहे आंदोलन की गति को और तीव्र करते हुये आज से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार प्रारम्भ किया तथा ऊर्जा निगम प्रबन्धन के हठवादी रवैये तथा सरकार को गुमराह किये जाने के कारण ऊर्जा क्षेत्र में पनपे टकराव एवं औद्योगिक आशांति को समाप्त करने हेतु संघर्ष समिति ने मा0 मुख्यमंत्री जी से प्रभावी हस्तक्षेप की पुनः अपील करते हुये उप्र के उपभोक्ताओं, आम जनता तथा बिजलीकर्मियों के हितों की रक्षा हेतु ऊर्जा निगम प्रबन्धन के निजीकरण के प्रस्ताव को तत्काल निरस्त करने की मांग की। 
बिजली व्यवस्था में सकारात्मक सुधार के अपने संकल्प को दोहराते हुये संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री मा0 योगी आदित्यनाथ जी से पुनः अपील की है कि ऊर्जा क्षेत्र में सुधार हेतु संघर्ष समिति को विश्वास में लेकर सुधारात्मक कदम उठाये जाने हेतु ऊर्जा निगम प्रबन्धन को निर्देशित किया जाए। उप्र के बिजलीकर्मियों का प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार कल भी जारी रहेगा।  
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने बताया कि आज पूरे प्रदेश में राजधानी लखनऊ समेत अनपरा, ओबरा, मेरठ, नोएडा, गाजियाबाद, सहारनपुर, बुलन्दशहर, गोरखपुर, आजमगढ़, वाराणसी, प्रयागराज, मिर्जापुर, कानपुर, झांसी, मुरादाबाद, बरेली, बांदा, आगरा, अलीगढ़, पनकी, पारीछा, हरदुआगंज, बस्ती, अयोध्या, देवीपाटन, पिपरी समेत सभी जनपद मुख्यालयों एवं परियोजनाओं पर बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों एवं अभियन्ताओं ने पूर्ण कार्य बहिष्कार किया  सम्मिलित हुए तथा हजारों की संख्या में शांतिपूर्ण ढंग से जोरदार नारेबाजी का अपना विरोध दर्ज कराया। बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों एवं अभियन्ताओं के पहले दिन के पूर्ण कार्य बहिष्कार से प्रदेश के विभिन्न स्थानों की विद्युत आपूर्ति प्रभावित रही। अस्पतालों, पेयजल एवं अन्य आवश्यक सेवाओं की विद्युत आपूर्ति में कोई व्यवधान नही आने दिया गया। 
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि पूर्व घोषित नोटिस के अनुसार आज दिनांक 05 अक्टूबर से शुरु हुए कार्य बहिष्कार के दौरान बिजली उत्पादन गृहों, 765/400 केवी के विद्युत उपकेन्द्रो एवं प्रणाली नियंत्रण में शिफ्ट में कार्य करने वाले कार्य बहिष्कार में सम्मिलित नही हैं जिससे कि जनता को अनावश्यक तकलीफ न हो। संघर्ष समिति ने पुनः बताया कि जारी अनिश्चिकालीन कार्य बहिष्कार के दौरान अस्पतालों एवं पेयजल व अन्य आवश्यक सेवाओं की विद्युत आपूर्ति बनाये रखा जायेगा जिससे कि आम जनता को असुविधा का सामना न करना पड़े। 
संघर्ष समिति ने बताया कि मा ऊर्जा मंत्री एवं प्रबन्धन के साथ अपराह्न 03 बजे से प्रारम्भ संघर्ष समिति की वार्ता अब भी जारी है एवं संघर्ष समिति ने पुनः मांग करती है कि ऊर्जा निगम प्रबन्धन हठधर्मिता तथा बिजलीकर्मियों के प्रति द्वेषभावना छोड़कर निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल निरस्त करें तथा संघर्ष समिति को विश्वास में लेकर वर्तमान व्यवस्था में ही सुधार की कार्य योजना बनाई जाय जिसके लिये बिजलीकर्मी संकल्पबद्ध है।

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