हजारों साल पुरानी मुड़िया मेले की परंपरा महामारी ने खत्म की

हजारों साल पुरानी मुड़िया मेले की परंपरा महामारी ने खत्म की
मथुरा
वैश्विक कोरोना महामारी ने हजारों  वर्षो से चली आ रही गोवर्धन के मुड़िया मेले की परंपरा को भी तोड़ दिया। हर वर्ष यह मेला आज एकादशी से पूर्णिमा सी तक लगता रहा है। इस बार ये मेला नहीं लग रहा है। 
उत्तर भारत का यह सबसे बड़ा मेला  माना जाता है। वर्ष 2019 के पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस मेले में  5 दिन के अंदर  एकादशी से पूर्णिमा सी तक  95 लाख लोगों ने परिक्रमा की थी। इसमे समूचे मध्यप्रदेश  राजस्थान,  दिल्ली,  एनसीआर, उत्तर प्रदेश,  चंडीगढ़, हरियाणा  समेत तमाम प्रदेशों के भक्त गिरिराज जी की परिक्रमा लगाने आते हैं। अब भक्तों को रोकने के लिए प्रशासन की 50 टीमें बनाई गई हैं। सभी रूटों पर बैरियर लगाने पड़ गए हैं। राजस्थान  की ओर  से आने वाले वाहनों को  रोकने के लिए राजस्थान सरकार ने बड़े इंतजाम किए हैं।  इस मेले का आयोजन 1 जुलाई से 5 जुलाई तक होना था। वैश्विक महामारी कोविड.19 से मथुरा के कई इलाके हॉटस्पॉट के कारण सील है। प्रमुख मंदिर गोवर्धन में 8 जुलाई तक बंद है। मेला लगने से श्रद्धालुओं की अधिक संख्या के कारण सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन संभव नहीं हो सकेगा। मथुरा जनपद के अलावा राजस्थान प्रदेश के सटे जनपद भरतपुर भी उक्त महामारी से प्रभावित है। इस मेले की परिक्रमा मार्ग में भरतपुर का ढाई तीन किलोमीटर का क्षेत्रफल पड़ता है। इन सभी परिस्थितियों को मद्देनजर रखते हुए जिलाधिकारी ने मुड़िया पूर्णिमा मेले को निरस्त करने के आदेश जारी कर दिए है।
ब्यूरो रिपोर्ट इंडिपेंडेंट इंडिया सूत्र

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