(संवाद सूत्र,इंडिपेंडेंट इंडिया)बांदा/जसपुरा:- कोरोना संक्रमण से पूरा विश्व परेशान हैं इसको रोकने के लिया हर जगह हर लोग कुछ न कुछ उपाय कर रहे हैं।वही बाँदा जनपद के एक गांव में जिसका नाम जसपुरा हैं वहाँ पर इस महामारी को रोकने के लिए पूजा,पाठ व हवन के बाद एक आजमाया हुआ अनोखा तरीका देखने को मिला जहाँ पर पूरे गांव के लोगो ने एकांत में अपने घरों से दूर बाग बगीचों में खाना बनाकर खाया पिया।गांव वालों का मानना है कि गांव के ही एक सन्त थे जिन्होंने ने 100 साल पहले आई कोरोना जैसी ही एक महामारी जो उस समय स्पेनिश फ्लू के नाम से जानी जाती थी उसको रोकने के लिए उन सन्त जी द्वारा सभी गांव वालों को वैशाख माह की अमावस्या के बाद पड़ने वाले पहले मंगलवार के दिन जिसको उन्होंने बुढ़वा मंगल नाम दिया था यदि उस दिन सभी गांव के लोग अपने अपने घरों में खाना न बनाकर बाग बगीचों में खाना बनाकर वही पर खाये तो इस महामारी का प्रकोप नही रहेगा। और गांव वालों की माने तब से इस गांव में कोई भी बड़ी बीमारी या महामारी नही आई।गांव के 90 वर्षीय बुजुर्ग लक्ष्मी सिंह ने बताया की उनके पूर्वजों ने बताया था कि जब सारे संसार मे कालरा फैला था तब इस गांव में भी प्रत्येक घर से कोई न कोई मर रहा था स्थिति यह हो गई थी कि लोग एक व्यक्ति का अंतिम संस्कार करके घर नही पहुँच पाते थे कि उनको दूसरे का अंतिम संस्कार करना पड़ता था तब सभी लोगो ने गांव के बड़े सेवाला अर्थात राधा जानकी जी के मंदिर के पुजारी एवं बड़े सन्त महापुरुष मधुसूदन दास जी से इस बीमारी के बचाव के बारे में पूछा तो उन्होंने उपाय बताया था कि सभी लोग बुढ़वा मंगल को गांव के बाहर भोजन बनाकर खाये तो इस महामारी से मुक्ति मिलेगी।तब से इस गांव के सभी लोगो ने गांव के बाहर खाना बनाया व खाया तो कालरा से मुक्ति मिली।तब से सब लोग साल में एक बार गांव के बाहर भोजन बनकर खाते थे लेकिन अब धीरे धीरे यह प्रथा खत्म सी हो गई हैं।
गांव के बाहर भोजन बनाकर खाने से बाग बगीचों में जाने से प्रकति से जुड़ाव हो जाता है तथा लोग एकान्तवास में भी रहते हैं।जब 1918 में स्पेनिश फ्लू फैला था तब भी एकान्तवास के लिए कहा जाता था और अब भी कोरोना से बचाव हेतु एकान्तवास ही कहा जाता हैं।
By Shadab Ahmad, Bureau Chief

