फतेहपुर:- जनपद के ताम्बेश्वर मन्दिर के पास संचालित क्लीनिक विकास हॉस्पिटल प्रसव केन्द्र में नाबालिग लड़कियों का एबोर्शन कराया जाता है आपको बताते चलें कि उक्त क्लीनिक सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र गोपालगंज में तैनात स्वास्थ्य पर्यवेक्षक गुलाब सिंह पटेल ने अपने पुत्र विकास हॉस्पिटल प्रसव केन्द्र के नाम से खोल रखा है,
बताया जाता है कि भ्रूण हत्या का यह सिलसिला कई वर्षों से चल रहा है सूत्रों की मानें तो उक्त क्लीनिक का रजिस्ट्रेशन भी नहीं है बल्कि अधिकारियों से सेटिंग गेटिंग कर भ्रूण हत्या का कार्य खुले आम मुख्यालय स्तर पर चल रहा है और किसी भी अधिकारी को कानों कान खबर तक नहीं जहां पर स्वास्थ्य पर्यवेक्षक गुलाब सिंह पटेल क्लीनिक में बैठकर भ्रूण गिराने की तो पूरी लिस्ट लिए बैठे हैं,
जहां तीन माह का भ्रूण गिराने के लिए आठ से दस हजार रुपये की मांग कर रहें हैं दूसरी बड़ी बात यह है कि स्वास्थ्य पर्यवेक्षक अपने आपको अपने विजिटिंग कार्ड पर डॉक्टर लिखता है जबकि स्वास्थ्य पर्यवेक्षक अपने आपको डॉक्टर नहीं लिख सकता इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो सकती है आखिर इतने बड़े जुर्म की दुनिया मे कार्य करने वाले आला अफसरों के मुख्यालयों में रहकर कार्य किया जा रहा ह,
ो और किसी को इसकी भनक तक न हो तो ऐसे में कहीं न कहीं अधकारियों की भी संलिप्तता साफ नजर आती है इस सम्बन्ध में जिलाधिकारी फतेहपुर से दूरभाष के जरिये जानकारी लेनी चाही गयी तो उनका सीयूजी नम्बर बन्द होने की वजह से बात नहीं हो सकी।
बताया जाता है कि भ्रूण हत्या का यह सिलसिला कई वर्षों से चल रहा है सूत्रों की मानें तो उक्त क्लीनिक का रजिस्ट्रेशन भी नहीं है बल्कि अधिकारियों से सेटिंग गेटिंग कर भ्रूण हत्या का कार्य खुले आम मुख्यालय स्तर पर चल रहा है और किसी भी अधिकारी को कानों कान खबर तक नहीं जहां पर स्वास्थ्य पर्यवेक्षक गुलाब सिंह पटेल क्लीनिक में बैठकर भ्रूण गिराने की तो पूरी लिस्ट लिए बैठे हैं,
जहां तीन माह का भ्रूण गिराने के लिए आठ से दस हजार रुपये की मांग कर रहें हैं दूसरी बड़ी बात यह है कि स्वास्थ्य पर्यवेक्षक अपने आपको अपने विजिटिंग कार्ड पर डॉक्टर लिखता है जबकि स्वास्थ्य पर्यवेक्षक अपने आपको डॉक्टर नहीं लिख सकता इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो सकती है आखिर इतने बड़े जुर्म की दुनिया मे कार्य करने वाले आला अफसरों के मुख्यालयों में रहकर कार्य किया जा रहा ह,
ो और किसी को इसकी भनक तक न हो तो ऐसे में कहीं न कहीं अधकारियों की भी संलिप्तता साफ नजर आती है इस सम्बन्ध में जिलाधिकारी फतेहपुर से दूरभाष के जरिये जानकारी लेनी चाही गयी तो उनका सीयूजी नम्बर बन्द होने की वजह से बात नहीं हो सकी।
रिपोर्ट धर्मेश कुमार, संवाददाता

