मिशन गगनयान :
– ISRO ने रचा इतिहास, मिशन गगनयान का किया सफल परीक्षण।
ISRO : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने मिशन गगनयान का सफल परीक्षण करके एक कीर्तिमान हासिल किया है।
ISRO ने आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से क्रू एस्केप सिस्टम के गगनयान लो एल्टीट्यूड एस्केप मोटर का सफल परीक्षण किया है।
ISRO ने आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से क्रू एस्केप सिस्टम के गगनयान लो एल्टीट्यूड एस्केप मोटर का सफल परीक्षण किया है।
बुधवार को अधिकारियों ने इस सफल परीक्षण की जानकारी दी है। इसरो ने एक बयान जारी कर बताया कि क्रू एस्केप सिस्टम (CES) किसी भी घटना के मामले में गगनयान मिशन के क्रू माड्यूल को अलग कर देता है और अंतरिक्ष को बचाने का काम करता है।
ISRO ने हासिल की बड़ी उपलब्धि।
इसरो के अनुसार, उड़ान के प्रथम चरण में मिशन निरस्त होने के मामले में एलईएम सीईएस को जरूरत पड़ने वाला बल देता है। इससे प्रक्षेपण यान से क्रू माड्यूल अलग हट जाता है। एलईएम चार रिवर्स फ्लो नोजल के साथ एक विशिष्ट प्रकार की ठोस राकेट मोटर है
जो 5.98 सेकेंड के जलने के समय के साथ 842 केएन का अधिकतम बल उत्पन्न करता है। एलईएम का नोजल सिरा क्रू माड्यूल पर एग्जास्ट प्लम इंपिंगमेंट से बचने के लिए पारंपरिक राकेट मोटर्स में पिछे के छोर के विपरीत लान्च वाहन के सामने के छोर पर लगाया गया है। इस ठोस राकेट मोटर में एक रिवर्स फ्लो मल्टीपल नोजल के उपयोग की आवश्यकता होती है।
जो 5.98 सेकेंड के जलने के समय के साथ 842 केएन का अधिकतम बल उत्पन्न करता है। एलईएम का नोजल सिरा क्रू माड्यूल पर एग्जास्ट प्लम इंपिंगमेंट से बचने के लिए पारंपरिक राकेट मोटर्स में पिछे के छोर के विपरीत लान्च वाहन के सामने के छोर पर लगाया गया है। इस ठोस राकेट मोटर में एक रिवर्स फ्लो मल्टीपल नोजल के उपयोग की आवश्यकता होती है।
गगनयान मिशन के बारे में जानें?
बता दें कि 15 अगस्त 2018 को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने ‘गगनयान मिशन’ के माध्यम से 2022 में या उससे पहले अंतरिक्ष में भारतीय अंतरिक्ष यात्री को भेज देने की घोषणा की थी। लेकिन कोविड-19 के कारण इस मिशन में एक साल की देरी हो गई। जानकारी के अनुसार,
इसके तहत दो अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की कक्षा में पांच-सात दिनों के लिए भेजने की योजना है। गगनयान को अंतरिक्ष में लांच करने के लिए भारी-भरकम सैटेलाइटों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने में सक्षम जीएसएलवी मार्क-3 राकेट का उपयोग किया जाएगा। यह राकेट पूर्णतः स्वदेशी तकनीक पर आधारित है।


