संवाद सूत्र इंडिपेंडेंट इंडिया कानपुर सिटी
धूमधाम से मनाया गया क्रिसमस का जश्न,सैंटा क्लॉस तथा क्रिसमस ट्री रहे आकर्षण का केंद्र
सिटी/कानपुर
जिले भर में क्रिसमस का त्यौहार शुक्रवार को धूमधाम से मनाया गया है। बृहस्पतिवार की रात जैसे ही 12:00 बजे शहर के गिरजाघरों में विशेष पूजा प्रार्थनाएं शुरू हो गईं। शहर समेत जुड़े हुए ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों व अन्य संस्थाओं में विविध कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें सांता क्लॉस और क्रिसमस ट्री आकर्षण का केंद्र रहे।
प्रभु यीशु का जन्मदिन क्रिसमस के रूप में मनाया जाता है। इसीक्रम मे चर्च एवं घरों को रंग-बिरंगी झालरों से सजाया गया है। शुक्रवार को निर्धारित कोविड-19 नियमों के तहत चर्च में लोगों ने एकत्रित हो केक काटकर खुशियां बांटी। केक काटकर प्रभु यीशु को याद किया गया। गिरिजा घरों एवं अन्य संस्थानों में प्रभु यीशु के जन्म को दर्शाती झांकियां भी सजाई गई थी।
बच्चों के साथ महिलाएं एवं बड़े बुजुर्ग भी उत्साह के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए। रंग-बिरंगे कपड़ों में लोगों ने क्रिसमस का जश्न धूमधाम से मनाया गया। वहीं न्यू इंडिया चर्च ऑफ गॉड की एक शाखा में क्रिसमस के उपलक्ष्य में प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया।चर्च में प्रभु यीशु के जन्म से संबंधित गीत भी गाए गए। पूरे दिन लोगों को क्रिसमस की बधाई देते हुए देखा गया। यही नहीं ईसाई समुदाय के लोगों ने अपने सगे संबंधियों एवं मित्रों को फोन पर भी क्रिसमस की बधाईयां दी। वही त्यौहार को लेकर चर्च एवं घरों आदि में सजी लाइटें लोगों का मनमोह रही थी। प्रभु यीशु के जन्मदिवस पर बच्चों एवं युवतियों ने कैंडल जलाई। वहीं स्कूलों में भी क्रिसमस डे पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। स्कूलों में भी क्रिसमस डे पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया जिसमें सजे क्रिसमस ट्री और सांता क्लॉस ने बच्चों का मनमोह लिया।
इधर क्रिसमस के उपलक्ष्य में पास्टर इंद्रकुमार ने बताया कि हर साल की तरह इस वर्ष भी क्रिसमस का त्यौहार मनाया जा रहा है लेकिन कॉरोना गाइड लाइन को देखते हुए पहले ही सदस्य संख्या सीमित कर दी गई थी।प्रार्थना स्थल पर बाहरी लोगों पर रोक लगा दी गई है।उन्होंने कहा कि ईसाई धर्म के प्रवर्तक ईसा मसीह सेवा, प्रेम और क्षमता के त्रयी थे। निः स्वार्थ सेवा से सौहार्द के सुमन खिलते हैं। वह प्रेम और मानव समाज के प्रति समर्पण ही तो था कि ईसा मसीह कांटो का ताज पहनकर सलीम ढोते हुए चुपचाप चले।सलीब पर टंगे हुए कीलों के नुकीलेपन से लहूलुहान होने के बावजूद सजा देने वाले को यह कह सके,’ हे ईश्वर,इन्हे क्षमा करना।
इस मौके पर पास्टर इंद्रकुमार दास,गूंजा दास, नैंसी, अमोश,वीरू गौतम,रूबी,आरती सिंह आदि लोग मौजूद रहे।

