चार माह की योग निद्रा के बाद इसी कार्तिक माह में भगवान विष्णु जागते हैं और सृष्टि का कार्यभार दोबारा से ग्रहण करते हैं। इस महीने में मां लक्ष्मी का जन्म और पृथ्वी पर आगमन होता है। कार्तिक में दान, दीपदान और पूजा पाठ का विशेष महत्व होता है।
हिंदू धर्म में कार्तिक माह का विशेष महत्व होता है। यह माह सभी में सबसे प्रमुख माना गया है। इस माह में एक साथ कई व्रत-त्योहार मनाए जाते है। चार माह की योग निद्रा के बाद इसी कार्तिक माह में भगवान विष्णु जागते हैं और सृष्टि का कार्यभार दोबारा से ग्रहण करते हैं। इस महीने में मां लक्ष्मी का जन्म और पृथ्वी पर आगमन होता है। कार्तिक में दान, दीपदान और पूजा पाठ का विशेष महत्व होता है।
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा कहते हैं। यह तिथि कार्तिक माह के समापन की अंतिम तिथि मानी जाती है। इसी तिथि पर भगवान शंकर ने त्रिपुरासुर नाम के राक्षस का वध किया था इस कारण से इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहते हैं। इसके अलावा ऐसी मान्यता है
कि कार्तिक पूर्णिमा पर ही भगवान विष्णु ने मत्स्यावतार लिया था। मान्यता है कि यह भगवान विष्णु का पहला अवतार है। पौराणिक कथा के अनुसार जब पृथ्वी पर जल प्रलय आया था तब पृथ्वी जल में समा गई थी। तब भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लेकर पूरे पृथ्वी वासियों की रक्षा की थी। कार्तिक पूर्णिमा के दिन गुरुनानक देव की जयंती मनाई जाती है। आइए जानते हैं कार्तिक पूर्णिमा से जुड़ी मान्यताएं…
कि कार्तिक पूर्णिमा पर ही भगवान विष्णु ने मत्स्यावतार लिया था। मान्यता है कि यह भगवान विष्णु का पहला अवतार है। पौराणिक कथा के अनुसार जब पृथ्वी पर जल प्रलय आया था तब पृथ्वी जल में समा गई थी। तब भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लेकर पूरे पृथ्वी वासियों की रक्षा की थी। कार्तिक पूर्णिमा के दिन गुरुनानक देव की जयंती मनाई जाती है। आइए जानते हैं कार्तिक पूर्णिमा से जुड़ी मान्यताएं…
– कार्तिक पूर्णिमा के दिन देवताओं की दीपावली मनाई जाती है जिसे देव दीपावली कहा जाता है। इस तिथि पर समस्त देवी-देवता भगवान भोलेनाथ की पवित्र नगरी वाराणसी में स्वर्गलोक से सीधे उतर कर आते हैं और देव दिवाली मनाते हैं।
– कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। मान्यता है भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नाम के राक्षस का वध किया था। इसी वजह से इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा कहते हैं।
– कार्तिक पूर्णिमा की तिथि पर ही सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देवजी का जन्म हुआ था इस कारण से भी कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्व है।
– कार्तिक पूर्णिमा की तिथि कार्तिक माह की अंतिम तिथि होती है। ऐसे में इस दिन पवित्र नदी में स्नान, दान, दीपदान,हवन और पूजा अनुष्ठान करने से विशेष शुभ फल की प्राप्ति होती है।

