Mainpuri : मैनपुरी में लोकसभा चुनाव का बिगुल बजते ही मुलायम सिंह यादव की कर्मभूमि पर होने वाले उपचुनाव में सपा और भाजपा के बीच ही मुख्य मुकाबला है। लेकिन सोमवार को लखनऊ में जिलाध्यक्षों के साथ हुई बसपा सुप्रीमो की बैठक में मैनपुरी सीट से प्रत्याशी न उतारने के संकेत से चुनावी गणित गड़बड़ा गया है,
ऐसे में बेसवार हाथी साइकिल की रफ्तार पर ब्रेक लगाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
नेताजी मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद खाली हुई मैनपुरी लोकसभा सीट पर सपा के सामने विरासत बचाने की चुनौती है। वहीं भाजपा सपाई दुर्ग को ध्वस्त कर मैनपुरी पर भगवा लहराना चाहती है।
चुनाव में मुख्य मुकाबला भले ही सपा भाजपा में है, लेकिन इसमें बसपा भी अहम भूमिका निभाएगी।
नेताजी मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद खाली हुई मैनपुरी लोकसभा सीट पर सपा के सामने विरासत बचाने की चुनौती है। वहीं भाजपा सपाई दुर्ग को ध्वस्त कर मैनपुरी पर भगवा लहराना चाहती है।
चुनाव में मुख्य मुकाबला भले ही सपा भाजपा में है, लेकिन इसमें बसपा भी अहम भूमिका निभाएगी।
दरअसल बताते चलें 2019 का लोकसभा चुनाव सपा और बसपा गठबंधन ने एक साथ लड़ा था। मुलायम सिंह यादव गठबंधन के ही प्रत्याशी थे। इसके बाद भी मुलायम की जीत का आंकड़ा बीते 2014 के चुनाव और उप चुनाव की अपेक्षा काफी कम रह गया था। वहीं इस बार तो हाथी भी साइकिल की रफ्तार को बढ़ाने की बजाए और धीरे कर सकता है।

