नहरें सूखी, सिंचाई को तरस रहे किसान; गेहूं-सरसों की फसल पर संकट

ब्यूरो चीफ, बरेली | हरीश कुमार गौतम

बरेली जिले में नहरों में पानी न आने से किसान गंभीर संकट में हैं। रबी फसलों की सिंचाई प्रभावित हो रही है, मजबूरन किसान महंगे इंजनों से खेतों में पानी लगा रहे हैं। सिंचाई विभाग की लापरवाही से किसानों में भारी नाराजगी है।

बरेली जिले में नहरों में पानी न आने से किसान गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं और सरसों की बुवाई के बाद अब सिंचाई का समय आ चुका है, लेकिन नहरें सूखी पड़ी हैं। किसानों का कहना है कि सिंचाई विभाग की लापरवाही के कारण उन्हें समय पर पानी नहीं मिल पा रहा है।

15 अक्टूबर से गेहूं की बुवाई शुरू हो जाती है। अक्टूबर और नवंबर में बुवाई करने वाले किसानों की फसलों को इस समय सिंचाई की सख्त जरूरत है, लेकिन नवंबर बीत जाने और दिसंबर का आधा महीना गुजर जाने के बावजूद नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया।

मजबूरी में कई किसानों को डीजल इंजन से सिंचाई करनी पड़ी है। निजी इंजन से सिंचाई कराने पर 170 रुपये प्रति घंटा तक खर्च आ रहा है, जिसे गरीब किसान वहन नहीं कर पा रहे हैं। जिन किसानों के पास इंजन की सुविधा नहीं है, वे सबसे अधिक परेशान हैं।

किसानों का आरोप है कि नहरों की समय पर सफाई नहीं कराई गई और कई स्थानों पर पुलिया टूटी हुई हैं। मरम्मत कार्य अधूरा पड़ा है, जिससे सिंचाई व्यवस्था और प्रभावित हो रही है।

किसानों ने सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता, जिलाधिकारी बरेली, प्रदेश के सिंचाई मंत्री और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि नहरों में पानी छोड़ने की तिथि सार्वजनिक की जाए, ताकि किसान अपनी फसलों को बचा सकें।

अगर जल्द नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया तो गेहूं और सरसों की फसल को भारी नुकसान होने की आशंका है।

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