उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में लगातार घमासान बड़ता जा रहा है, माननीय बनने की चाहत रखने वाले टिकट न मिलने की स्थिति में विद्रोह करने के लिए तैयार दिख रहे है, सबसे अधिक घमासान समाजवादी पार्टी में दिख रहा है, खासतौर समाजवादी पार्टी के गढ़ कहे जाने वाले आजमगढ़ में जहां से खुद समाजवादी पार्टी के मुखिया सांसद है, अब चर्चा है कि टिकट कटने से नाराज पूर्व विधायक श्याम बहादुर यादव बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो घमासान और बढ़ाना तय है,
आपको बता दें कि समाजवादी पार्टी ने जिले की सात और बभारतीय जनता पार्टी ने छह सीटों पर प्रत्याशी की घोषणा कर दी है, सपा द्वारा टिकट घोषित करने के बाद से ही पार्टी में घमासान मचा हुआ है। निजामाबाद, फूूलपुर पवई और गोपालपुर में कार्यकर्ता और दावेदार खुलकर विद्रोह कर रहे है, निजामाबाद में जहां पूर्व प्रमुख इसरार अहमद निर्दल मैदान में उतरने की घोषणा कर चुके हैं तो गोपालपुर में पूर्व मंत्री वसीम अहमद की पत्नी शमा वसीम दूसरे दल में विकल्प तलाश रही हैं,
सबसे अधिक घमासान फूलपुर पवई सीट में दिख रहा है, जहां पार्टी ने बाहुबली रमाकांत यादव को मैदान में उतारा है। पूर्व विधायक श्याम बहादुर यादव के समथर्क खुलकर रमाकांत का विरोध कर रहे हैं। अब तक डेढ़ दर्जन पदाधिकारी और सैकड़ों कार्यकर्ता पद और पार्टी से त्यागपत्र दे दिये है। लोग रमाकांत को अवसरवादी बताते हुए टिकट बदलने की मांग कर रहे हैं। वहीं श्याम बहादुर यादव लखनऊ में जमें हुए हैं, श्याम बहादुर के करीबी सूत्रों की मानें तो राष्ट्रीय अध्यक्ष पर टिकट बदलने का पूरा दबाव है।
इसके बाद भी यदि रमाकांत को चुनाव लड़ाया जाता है तो पूर्व विधायक बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। बशर्ते पार्टी उन्हेें टिकट देने का भरोसा दे। अगर श्याम बहादुर बीजेपी में जाते हैं और उन्हें टिकट मिलता है तो लड़ाई दिलचस्प हो जाएगी। कारण कि रमाकांत और श्याम बहादुर में छत्तीस का आंकड़ा है। श्याम बहादुर को अखिलेश यादव का करीबी भी माना जाता है। वे छात्र जीवन से ही राजनीति कर रहे हैं। ऐसे में सभी की नजर श्याम बहादुर और फूलपुर पवई विधानसभा पर टिकी है।
आपको बता दें कि समाजवादी पार्टी ने जिले की सात और बभारतीय जनता पार्टी ने छह सीटों पर प्रत्याशी की घोषणा कर दी है, सपा द्वारा टिकट घोषित करने के बाद से ही पार्टी में घमासान मचा हुआ है। निजामाबाद, फूूलपुर पवई और गोपालपुर में कार्यकर्ता और दावेदार खुलकर विद्रोह कर रहे है, निजामाबाद में जहां पूर्व प्रमुख इसरार अहमद निर्दल मैदान में उतरने की घोषणा कर चुके हैं तो गोपालपुर में पूर्व मंत्री वसीम अहमद की पत्नी शमा वसीम दूसरे दल में विकल्प तलाश रही हैं,
सबसे अधिक घमासान फूलपुर पवई सीट में दिख रहा है, जहां पार्टी ने बाहुबली रमाकांत यादव को मैदान में उतारा है। पूर्व विधायक श्याम बहादुर यादव के समथर्क खुलकर रमाकांत का विरोध कर रहे हैं। अब तक डेढ़ दर्जन पदाधिकारी और सैकड़ों कार्यकर्ता पद और पार्टी से त्यागपत्र दे दिये है। लोग रमाकांत को अवसरवादी बताते हुए टिकट बदलने की मांग कर रहे हैं। वहीं श्याम बहादुर यादव लखनऊ में जमें हुए हैं, श्याम बहादुर के करीबी सूत्रों की मानें तो राष्ट्रीय अध्यक्ष पर टिकट बदलने का पूरा दबाव है।
इसके बाद भी यदि रमाकांत को चुनाव लड़ाया जाता है तो पूर्व विधायक बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। बशर्ते पार्टी उन्हेें टिकट देने का भरोसा दे। अगर श्याम बहादुर बीजेपी में जाते हैं और उन्हें टिकट मिलता है तो लड़ाई दिलचस्प हो जाएगी। कारण कि रमाकांत और श्याम बहादुर में छत्तीस का आंकड़ा है। श्याम बहादुर को अखिलेश यादव का करीबी भी माना जाता है। वे छात्र जीवन से ही राजनीति कर रहे हैं। ऐसे में सभी की नजर श्याम बहादुर और फूलपुर पवई विधानसभा पर टिकी है।

