• सरकारी स्कूल में लगातार घट रहे है बच्चों के दाखिले.. चिंता का विषय
• प्राइवेट स्कूलों पर भरोसा जता रहे अभिभावक
जहाँ सरकार सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा व्यवस्था देने की बात करती है | वही शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नए-नए दावे करती है | तो वहीं दूसरी तरफ इन सरकारी स्कूलों की हालत इतनी खराब है कि स्कूलों में छात्रों की संख्या लगातार घटती जा रही है | ऐसा ही हाल उत्तर प्रदेश के सभी जनपद के अनेक सरकारी स्कूलों का है | सरकारी स्कूलों में ड्रेस, भोजन, किताबें और बस्तों के मुफ्त दिये जाने के बावजूद सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या में कमी आ रही है। वहीं छोटे से छोटे स्तर पर गली-मोहल्लों में खोले गये निजी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ रही है। संसाधन और पढ़ाई की गुणवत्ता की वजह से यह बड़ा अंतर देखा जा रहा है।
स्कूल भेजने के नाम पर दिखावा होगा
आरटीई के तहत अपने बच्ची अनामिका का दाखिला प्राइवेट स्कूल में करवाने के इच्छुक अनामिका के पिता कहते हैं, “मैं किसानी करता हूं। इतना पैसा नहीं है कि अपनी बच्ची को किसी अच्छे प्राइवेट स्कूल में पढ़ा सकूं। इसलिए निर्धन बच्चों के दाखिले जो सरकार आरटीई के तहत प्राइवेट स्कूलों में करवा रही है,उसके लिए प्रयासरत हूं। सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ाने से बेहतर है कि न ही पढ़ाया जाये, क्योंकि वहां भेजने का मतलब स्कूल जाने के नाम पर दिखावा करना होगा। प्राइवेट स्कूल में कम से कम कुछ और मिले न मिले, पढ़ाई तो होगी।”
कई बार प्रयासों के बावजूद नहीं हुआ लागू*l
समाजसेवी सतवंत सिंह गौतम कहते हैं, “सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर बेहद खराब है। इसी कारण कोर्ट ने सरकारी स्कूलों में सरकारी अधिकारियों के बच्चों को पढ़ाये जाने के आदेश दिये थे, जिससे स्कूलों का स्तर और पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सके। लेकिन कई बार प्रयास किये जाने के बावजूद इसको लागू नहीं करवाया जा सका। जब तक यह व्यवस्था लागू नहीं होगी सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के स्तर और संसाधनों की कमी को पूरा नहीं किया जा सकेगा जो सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या कम होने की सबसे बड़ी वजह है।”
एंटी करप्शन एसडीसी संगठन होगा प्रयासरत
“बच्चों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में स्कूलों तक लाया जाये इसके लिए विभाग हर संभव प्रयास कर रहा है। शिक्षकों को भी यह सुझाव दिये गये हैं कि वह बच्चों के अभिभावकों को कन्वेंस करें कि वह बच्चों को स्कूल भेजें। साथ ही एन्टी करप्शन एसडीसी संगठन के राष्ट्रीय महासचिव प्रशान्त बाजपेयी ने बताया कि हमारे संगठन द्वारा प्रत्येक ब्लॉक में एक टीम गठित कर रहा है जो सरकारी स्कूल के अध्यापकों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंपर्क करेगा और बच्चों को सरकारी स्कूल में भेजने के लिए अभिभावकों को प्रेरित करेगा साथ ही सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा जिससे ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा के लिए दूर ना जाना पड़े |

