Chhattisgarh: आबकारी अधिकारी के साथ साथ समस्त विभाग के पदस्थ लोगो को भी लग चुका है सरगुजा जिला का हवा

आबकारी अधिकारी के साथ साथ समस्त विभाग के पदस्थ लोगो को भी लग चुका है सरगुजा जिला का हवा

सरगुजा
आबकारी विभाग का नया कारनामा:जाली दस्तावेज के सहारे नौकरी करने वाले युवक को जेल भेजने के बजाए वापस दे दी नौकरी,नियमों को दरकिनार कर मारा जा रहा स्थानीय बेरोजगारों का हक़!
सरगुजा जिले में संचालित शासकीय शराब दुकानों में धड़ल्ले से सरकारी नियम-कानूनों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही है।यहाँ प्रशासनिक कसावट के अभाव में लंबे समय से स्थानीय लोगों का हक़ मारा जा रहा है,साथ ही सरकारी पैसों का दुरुपयोग भी किया जा रहा है।छत्तीसगढ़ राज्य विपणन कॉर्पोरेशन लिमिटेड की स्थापना के समय बनाये गए सेवा नियम इन दुकानों में कोई मायने नही रखते।यहाँ गैर राज्यों से जाली दस्तावेज के सहारे लोग सेल्समैन से लेकर सुपरवाइजर तक बने बैठे हैं।ऐसा ही एक मामला तब सामने आया जब एक आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा मांगी गई जानकारी के बाद शहर के एक ही दुकान में 4 लोग अयोग्य एवं फर्जी दस्तावेज के बल पर नौकरी करते पाए गए।विभाग नें इनके ख़िलाफ़ कोई कड़ी कार्यवाही तो नहीं की,लेकिन वह चारों नें दुकान पर आना छोड़ दिया।या यूं कहें कि उन्हें नौकरी से निष्कासित कर दिया गया।
इसे विभागीय लापरवाही कहें या पहुँच का प्रभाव,जहाँ इन दोषी आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर इन्हें जेल भेजा जाना चाहिए।वहीं उनमें से एक व्यक्ति रजनीश सिंह निष्कासन के कुछ ही समय के बाद वापस बौरीपारा स्थित शासकीय शराब दुकान में काम करता पाया गया।जब इस बारे में जिला आबकारी अधिकारी से बात की गई तो उनहोने बताया कि अभी उक्त आरोपी सेल्समैन को प्लेसमेंट कम्पनी नें रखा जरूर है लेकिन उसकी अधिकारिक नियुक्ति नहीं की गई है।साथ ही उन्होंने बताया कि आरोपी के द्वारा पूर्व में अपने दस्तावेज जमा नहीं किये गए थे।अब उसके द्वारा दस्तावेज जमा किया गया है जिसका वेरिफिकेशन कराया जा रहा है।
सिर्फ यह ही नहीं शासकीय शराब दुकान में बड़ी संख्या में वह लोग भी कार्यरत हैं,जो पूर्व में प्राइवेट ठेकेदारों के अधीन काम कर चुके हैं।जबकि नियमानुसार वह लोग शासकीय शराब दुकानों में कार्य करने के लिए योग्य नहीं है।
क्या कहना है जिला आबकारी अधिकारी का
जिन चार लोगों को दुकानों से निकाला गया था,उनमें से एक व्यक्ति को फिलहाल देखरेख के लिए रखा गया है।अभी उसकी नियुक्ति नहीं की गई है।अभी उसके द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों की जाँच-पड़ताल की जा रही है।
ऐसे में एक बड़ा सवाल यह भी उठता है कि बिना किसी आधिकारिक नियुक्ति आदेश के उक्त दोषी व्यक्ति सरकारी संस्थान में कार्य कैसे कर रहा है,जबकि किसी भी दुकान में बाहरी व्यक्ति का प्रवेश पूरी तरह से वर्जित है।यही नहीं उक्त व्यक्ति की दुकान में कैश काउंट करने की तस्वीरें भी कैमेरे में कैद हुई हैं।
By Akash Jayswal,State Head Chhattisgarh

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